१९४३

1943 ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है।

घटनाएँ

जन्म

निधन

अब्दुल मलिक खान(बाल साहित्यकार)

अब्दुल मलिक खान का जन्म ०१.०२.१९४३ ई० को रन्हेरा, सरोला कला, झालावाड़ (राजस्थान) में हुआ। ये बाल साहित्य के प्रसिद्ध कवि हें।आपकी प्रमुख बाल साहित्य कृतियाँ हैं-

प्रमुख बाल कविताएँ हैं- दिन प्यारे गुड़धानी के, गाँव की हाट

संपर्क सूत्र- रामनगर, भवानी मंडी, झालावाड़, राजस्थान

आज़ाद हिन्द

आजाद हिन्द सरकार या आर्ज़ी हुक़ूमत-ए-आज़ाद हिन्द (उर्दू: عارضی حکومت‌ِ آزاد ہند‎; अंग्रेज़ी: Provisional Government of Free India) एक भारतीय अन्तःकालीन सरकार (अस्थाई सरकार) थी जिसे सिंगापुर में सन १९४३ में स्थापित किया गया था। यह अक्ष शक्तियों की सहायता से भारत को स्वाधीनता के लिए लड़ने वाले भारतीय राष्ट्रवादियों द्वारा बनाया गया था जिसका नेतृत्व सुभाष चंद्र बोस कर रहे थे। जर्मनी से एक 'यू बॉट' से दक्षिण एशिया आए, फिर वहाँ से जापान गये। जापान से वें सिंगापुर आये जहाँ आजा़द हिन्द की आस्थाई सरकार की नीव रखी गयी। जापानी साम्राज्य की सैनिक, आर्थिक और नैतिक सहायता से यह सारकार टिकी रही और जापान के १४ अगस्त १९४५ में आत्मसमर्पण करने के बावजूद आज़ाद हिन्द ने हार नहीं मानी और युद्ध जारी रखा। आज़ाद हिन्द मित्र देशों (एलॉयड पॉवर्स) से लड़ने वाली आखरी शक्ति था। सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु के दावे के बाद ही इस की सेना, आज़ाद हिन्द फ़ौज को पराजय मिली।

२१ अक्टूबर २०१८ को भारत सरकार ने आजाद हिन्द सरकार की स्थापना की ७५वीं जयन्ती मनायी और प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले से भारतीय ध्वज फहराया।आजाद हिन्द सरकार केवल नाम नहीं था बल्कि नेताजी के नेतृत्व में इस सरकार ने हर क्षेत्र में नई योजना बनाई थी। इस सरकार का अपना ध्वज था, अपना बैंक था, अपनी मुद्रा थी, अपना डाक टिकट था, अपनी गुप्तचर सेवा थी। नेताजी ने कम संसाधन में ऐसे शासक के विरुद्ध लोगों को एकजुट किया जिसका 'सूरज नहीं ढलता था'।

आधुनिक हिंदी पद्य का इतिहास

आधुनिक काल १८५० से

हिंदी साहित्य के इस युग को भारत में राष्ट्रीयता के बीज अंकुरित होने लगे थे। स्वतंत्रता संग्राम लड़ा और जीता गया। छापेखाने का आविष्कार हुआ, आवागमन के साधन आम आदमी के जीवन का हिस्सा बने, जन संचार के विभिन्न साधनों का विकास हुआ, रेडिओ, टी वी व समाचार पत्र हर घर का हिस्सा बने और शिक्षा हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार। इन सब परिस्थितियों का प्रभाव हिंदी साहित्य पर अनिवार्यतः पड़ा। आधुनिक काल का हिंदी पद्य साहित्य पिछली सदी में विकास के अनेक पड़ावों से गुज़रा। जिसमें अनेक विचार धाराओं का बहुत तेज़ी से विकास हुआ। जहां काव्य में इसे छायावादी युग, प्रगतिवादी युग, प्रयोगवादी युग, नयी कविता युग और साठोत्तरी कविता इन नामों से जाना गया, छायावाद से पहले के पद्य को भारतेंदु हरिश्चंद्र युग और महावीर प्रसाद द्विवेदी युग के दो और युगों में बांटा गया। इसके विशेष कारण भी हैं।

आर्थर ऐश

आर्थर रॉबर्ट ऐश का जन्म १० जुलाई १९४३ को रिचमंड, अमेरिका मे हुआ था। ऐश अंतरराष्ट्रीय टेनिस में सर्वोच्च स्तर पर खेलने वाले प्रथम अफ्रीकी अमेरिकन खिलाड़ी थे। हृदय की दो बार तथा मस्तिष्क की एक बार शल्य चिकित्सा होने के बाद उन्होंने समय से पहले ही कोर्ट छोड़ दिया था। बाद में उन्होंने अपने प्रभावशाली व्यक्तित्व के जरिये समाज में मानवाधिकार, जन स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े कार्यों में अहम् योगदान दिया.

ऐश को १९८८ में यह जानकारी मिली कि वे एचआईवी संक्रमण के शिकार हैं। इलाज के दौरान संक्रमित रक्त चढाये जाने से उन्हें यह संक्रमण हुआ था। १९९२ में ऐश ने अपनी बीमारी का सार्वजनिक रूप से खुलासा कर दिया. ऐश विश्व टेनिस जगत के सबसे भद्र खिलाड़ियों में से एक माने जाते थे। ऐश की मृत्यु ६ फ़रवरी १९९३ को न्यूयार्क सिटी में हुई।

आर्थर बी. मैकडोनाल्ड

आर्थर बी. मैकडोनाल्ड (२९ अगस्त १९४३) एक कनाडाई खगोल वैज्ञानिक हैं। इन्हें सन २०१५ में भौतिकी में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया हैं। ये पुरस्कार उन्होंने जापानी भौतिक विज्ञानी तकाकी काजिता के साथ संयुक्त रूप से मिला।

इलैयाराजा

इलैयाराजा (तमिल: இளையராஜா, उच्चारण: [ɪləjəɹɑːdʒɑː]) (जन्म: डेनियल राजैया २ जून, १९४३) भारतीय फिल्मों के संगीतकार, गीतकार तथा गायक हैं। इन्होने मुख्यतः दक्षिण भारतीय भाषाओं में बनी फ़िल्मों में संगीत दिया है। इनकी कर्मभूमि चेन्नई है। ये जन्म से दलीत थे।

ऑस्ट्रिया

ऑस्ट्रिया (जर्मन: Österreich एओस्तेराइख़, अर्थात पूर्वी राज्य) मध्य यूरोप में स्थित एक स्थल रुद्ध देश है। इसकी राजधानी वियना है। इसकी (मुख्य- और राज-) भाषा जर्मन भाषा है। देश का ज़्यादातर हिस्सा ऐल्प्स पर्वतों से ढका हुआ है। यूरोपीय संघ के इस देश की मुद्रा यूरो है। इसकी सीमाएं उत्तर में जर्मनी और चेक गणराज्य से, पूर्व में स्लोवाकिया और हंगरी से, दक्षिण में स्लोवाकिया और इटली और पश्चिम में स्विटजरलैंड और लीश्टेनश्टाइन से मिलती है। इस देश का उद्भव नौवीं शताब्दी के दौरान ऊपरी और निचले हिस्से में आबादी के बढ़ने के साथ हुआ। Ostarrichi शब्द का पहले पहल इस्तेमाल 996 में प्रकाशित आधिकारिक लेख में किया गया, जो बाद में Österreich एओस्तेराइख़ में बदल गया।

आस्ट्रिया में पूर्वी आल्प्स की श्रेणियाँ फैली हुई हैं। इस पर्वतीय देश का पश्चिमी भाग विशेष पहाड़ी है जिसमें ओट्जरस्टुवार्ड, जिलरतुल आल्प्स (१,२४६ फुट) आदि पहाड़ियाँ हैं। पूर्वी भाग की पहाड़ियां अधिक ऊँची नहीं हैं। देश के उत्तर पूर्वी भाग में डैन्यूब नदी पश्चिम से पूर्व को (३३० किमी लंबी) बहती है। ईन, द्रवा आदि देश की सारी नदियां डैन्यूब की सहायक हैं। उत्तरी पश्चिमी सीमा पर स्थित कांस्टैंस, दक्षिण पूर्व में स्थित न्यूडिलर तथा अतर अल्फ गैंग, आसे आदि झीलें देश की प्राकृतिक शोभा बढ़ाती हैं।

आस्ट्रिया की जलवायु विषम है। यहां ग्रर्मियों में कुछ अधिक गर्मी तथा जाड़ों में अधिक ठंडक पड़ती है। यहां पछुआ तथा उत्तर पश्चिमी हवाओं से वर्षा होती है। आल्प्स की ढालों पर पर्याप्त तथा मध्यवर्ती भागों में कम पानी बरसता है।

यहाँ की वनस्पति तथा पशु मध्ययूरोपीय जाति के हैं। यहाँ देश के ३८ प्रतिशत भाग में जंगल हैं जिनमें ७१ प्रतिशत चीड़ जाति के, १९ प्रतिशत पतझड़ वाले तथा १० प्रतिशल मिश्रित जंगल हैं। आल्प्स के भागों में स्प्रूस (एक प्रकार का चीड़) तथा देवदारु के वृक्ष तथा निचले भागों में चीड़, देवदारु तथा महोगनी आदि जंगली वृक्ष पाए जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि आस्ट्रिया का प्रत्येक दूसरा वृक्ष सरो है। इन जंगलों में हिरन, खरगोश, रीछ आदि जंगली जानवर पाए जाते हैं।

देश की संपूर्ण भूमि के २९ प्रतिशत पर कृषि होती है तथा ३० प्रतिशत पर चारागाह हैं। जंगल देश की बहुत बड़ी संपत्ति है, जो शेष भूमि को घेरे हुए है। लकड़ी निर्यात करनेवाले देशों में आस्ट्रिया का स्थान छठा है।

ईजबर्ग पहाड़ के आसपास लोहे तथा कोयले की खानें हैं। शक्ति के साधनों में जलविद्युत ही प्रधान है। खनिज तैल भी निकाला जाता है। यहां नमक, ग्रैफाइट तथा मैगनेसाइट पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। मैगनेसाइट तथा ग्रैफाइट के उत्पादन में आस्ट्रिया का संसार में क्रमानुसार दूसरा तथा चौथा स्थान है। तांबा, जस्ता तथा सोना भी यहां पाया जाता है। इन खनिजों के अतिरिक्त अनुपम प्राकृतिक दृश्य भी देश की बहुत बड़ी संपत्ति हैं।

आस्ट्रिया की खेती सीमित है, क्योंकि यहां केवल ४.५ प्रतिशत भूमि मैदानी है, शेष ९२.३ प्रतिशत पर्वतीय है। सबसे उपजाऊ क्षेत्र डैन्यूब की पार्श्ववर्ती भूमि (विना का दोआबा) तथा वर्जिनलैंड है। यहां की मुख्य फसलें राई, जई (ओट), गेहूँ, जौ तथा मक्का हैं। आलू तथा चुकंदर यहां के मैदानों में पर्याप्त पैदा होते हैं। नीचे भागों में तथा ढालों पर चारेवाली फसलें पैदा होती हैं। इनके अतिरिक्त देश के विभिन्न भागों में तीसी, तेलहन, सन तथा तंबाकू पैदा किया जाता है। पर्वतीय फल तथा अंगूर भी यहाँ होता है। पहाड़ी क्षेत्रों में पहाड़ों को काटकर सीढ़ीनुमा खेत बने हुए हैं। उत्तरी तथा पूर्वी भागों में पशुपालन होता है तथा यहाँ से वियना आदि शहरों में दूध, मक्खन तथा चीज़ पर्याप्त मात्रा में भेजा जाता है। जोरारलबर्ग देश का बहुत बड़ा संघीय पशुपालन केंद्र है। यहां बकरियां, भेड़ें तथा सुअर पर्याप्त पाले जाते हैं जिनसे मांस, दूध तथा ऊन प्राप्त होता है।

आस्ट्रिया की औद्योगिक उन्नति महत्वपूर्ण है। लोहा, इस्पात तथा सूती कपड़ों के कारखाने देश में फैले हुए हैं। रासायनिक वस्तुएँ बनाने के बहुत से कारखाने हैं। यहाँ धातुओं के छोटे मोटे सामान, वियना में विविध प्रकार की मशीनें तथा कलपुर्जे बनाने के कारखाने हैं। लकड़ी के सामान, कागज की लुग्दी, कागज एवं वाद्यतंत्र बनाने के कारखाने यहां के अन्य बड़े धंधे हैं। जलविद्युत् का विकास खूब हुआ है। देश को पर्यटकों का भी पर्याप्त लाभ होता है।

पहाड़ी देश होने पर भी यहाँं सड़कों (कुल सड़कें ४१,६४९ कि.मी.) तथा रेलवे लाइनों (५,९०८ कि.मी.) का जाल बिछा हुआ है। वियना यूरोप के प्राय: सभी नगरों से संबद्ध है। यहां छह हवाई अड्डे हैं जो वियना, लिंज़, सैल्बर्ग, ग्रेज, क्लागेनफर्ट तथा इंसब्रुक में हैं। यहां से निर्यात होनेवाली वस्तुओं में इमारती लकड़ी का बना सामान, लोहा तथा इस्पात, रासायनिक वस्तुएं और कांच मुख्य हैं।

विभिन्न विषयों की उच्चतम शिक्षा के लिए आस्ट्रिया का बहुत महत्व है। वियना, ग्रेज, लिंज़ तथा इंसब्रुक में संसारप्रसिद्ध विश्वविद्यालय हैं।

आस्ट्रिया में गणतंत्र राज्य है। यूरोप के ३६ राज्यों में, विस्तार के अनुसार, आस्ट्रिया का स्थान १९वाँ है। यह नौ प्रांतों में विभक्त है। वियना प्रांत में स्थित वियना नगर देश की राजधानी है। आस्ट्रिया की संपूर्ण जनसंख्या का १/४ भाग वियना में रहता है जो संसार का २२वाँ सबसे बड़ा नगर है। अन्य बड़े नगर ग्रेज, जिंज, सैल्जबर्ग, इंसब्रुक तथा क्लाजेनफर्ट हैं।

अधिकांश आस्ट्रियावासी काकेशीय जाति के हैं। कुछ आलेमनों तथा बवेरियनों के वंशज भी हैं। देश सदा से एक शासक देश रहा है, अत: यहां के निवासी चरित्रवान् तथा मैत्रीपूर्ण व्यवहारवाले होते हैं। यहाँ की मुख्य भाषा जर्मन है।

आस्ट्रिया का इतिहास बहुत पुराना है। लौहयुग में यहाँ इलिरियन लोग रहते थे। सम्राट् आगस्टस के युग में रोमन लोगों ने देश पर कब्जा कर लिया था। हूण आदि जातियों के बाद जर्मन लोगों ने देश पर कब्जा कर लिया था (४३५ ई.)। जर्मनों ने देश पर कई शताब्दियों तक शासन किया, फलस्वरूप आस्ट्रिया में जर्मन सभ्यता फैली जो आज भी वर्तमान है। १९१९ ई. में आस्ट्रिया वासियों की प्रथम सरकार हैप्सबर्ग राजसत्ता को समाप्त करके, समाजवादी नेता कार्ल रेनर के प्रतिनिधित्व में बनी। १९३८ ई. में हिटलर ने इसे महान् जर्मन राज्य का एक अंग बना लिया। द्वितीय विश्वयुद्ध में इंग्लैंड आदि देशों ने आस्ट्रिया को स्वतंत्र करने का निश्चय किया और १९४५ ई. में अमरीकी, ब्रितानी, फ्रांसीसी तथा रूसी सेनाओं ने इसे मुक्त करा लिया। इससे पूर्व अक्टूबर, १९४३ ई. की मास्को घोषणा के अंतर्गत ब्रिटेन, अमरीका तथा रूस आस्ट्रिया को पुन: एक स्वतंत्र तथा प्रभुसत्तासंपन्न राष्ट्र के रूप में प्रतिष्ठित कराने का अपना निश्चय व्यक्त कर चुके थे। २७ अप्रैल, १९४५ को डा. कार्ल रेनर ने आस्ट्रिया में एक अस्थायी सरकार की स्थापना की जिसने १९२०-२९ ई. के संविधान के अनुरूप आस्ट्रियाई गणतंत्र को पुन: प्रतिष्ठित किया। आस्ट्रिया की उक्त जनतांत्रिक सरकार को चारों मित्रराष्ट्रों की नियंत्रण परिषद् (कंट्रोल काउंसिल) ने २० अक्टूबर, १९४५ ई. को मान्यता दे दी। किंतु देश को वास्तविक स्वतंत्रता २७ जुलाई, १९५५ ई. को मिली जब ब्रिटेन, अमरीका, रूस तथा फ्रांस के साथ हुई आस्ट्रियन स्टेट संधि (१५ मई, १९५५ ई.) लागू की गई और बलात् अधिकार करनेवाली विदेशी सेनाएं वापस चली गईं।

वियना के भूतपूर्वू लार्ड मेयर फ्ऱांज जोनास २३ मई, १९६५ को आस्ट्रियाई गणतंत्र के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए और २५ अप्रैल, १९७१ को पुन: इन्हें ही राष्ट्रपति के पद पर चुन लिया गया जबकि इनके प्रतिद्वंद्वी कुर्ट बाल्ढीम असफल रहे। १० अक्टूबर, १९७१ को राष्ट्रीय असेंबली के चुनाव संपन्न हुए जिसमें ९३ समाजवादी, ८० पीपुल्स पार्टी और १० फ्रीडम पार्टी के प्रतिनिधि चुने गए।

जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय

जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय जम्मू और कश्मीर राज्य का न्यायालय हैं। इसे २८ अगस्त, १९४३ कश्मीर के महाराजा द्वारा जारी किए गए पेटेंट के आधार पर स्थापित किया गया था। इसकी न्यायालय कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर और शीतकालीन राजधानी जम्मू के बीच में परिवर्तित होता रहता है।

जी माधवन नायर

जी माधवन नायर (जन्म: २३ अक्टूबर १९४३) इसरो के भूतपूर्व अध्यक्ष, अंतरिक्ष विभाग के भूतपूर्व सचिव तथा अंतरिक्ष आयोग के भूतपूर्व अध्यक्ष हैं। उनका स्थान के राधाकृष्णन ने लिया।

जेम्स ब्रेड टेलर

सर जेम्स ब्रेड टेलर (21 अप्रैल 1891 - 17 फ़रवरी 1943) भारतीय रिजर्व बैंक के प्रथम डिप्टी गवर्नर व ओसबोर्न स्मिथ के बाद दूसरे गवर्नर थे। उन्होंने 1 जुलाई 1937 से 17 फ़रवरी 1943 को अपनी मृत्यु तक यह पद संभाला।

1 अप्रैल 1935 को उन्हें तथा सर सिकंदर हयात खान को भारतीय रिजर्व बैंक के प्रथम डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया गया। 1 जुलाई 1937 को वे गवर्नर के पद पर पदोन्नत हुए।

पीटर कपिज़ा

पीटर लीओ निडोविच कपिज़ा (रूसी: Пётр Леони́дович Капи́ца) ; 8 जुलाई 1894 - 8 अप्रैल 1984)) रूस के भौतिकविद् थे। उन्हे १९७८ में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

इनका जन्म ९ जुलाई सन १८९४ को क्रोंस्टाड्ट में हुआ। आपने प्रारंभिक शिक्षा पेट्रोग्राद में प्राप्त की। पदुपरांत आप कैंब्रिज में लार्ड रदरफ़र्ड के विद्यार्थी रहे और परमाणु विघटन अनुसंधान के क्षेत्र में अत्यंत प्रबल चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने की तकनीकी क्रियाप्रणाली के विकास में विशेष दक्षता प्राप्त की। सन् १९२४ में आपकी नियुक्ति कैवेंडिश प्रयोगशाला में चुंबकीय अनुसंधान के सहायक निर्देशक के रूप में हुई और १९३२ ई. तक इस पद पर कार्य करते रहे। सन् १९३० से १९३५ तक आप रॉयल सोसाइटी के सदस्य चुने गए और १९४२ में आपको फ़ैरेडे पदक प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त भौतिकी का स्टैलिन पुरस्कार आपको सन् १९४१ में और फिर १९४३ में मिला। सन् १९४३ और १९४४ में आप ऑर्डर ऑव लेनिन उपाधि से भी विभूषित किए गए।

सन् १९३४ में आप जब छुट्टी पर स्वदेश (रूस) गए तो सोवियत सरकार ने आपको पुन: देश से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी। कापिज़ा के लिए मास्को में कैवेंडिश प्रयोगशाला के टक्कर की प्रयोगशाला बनाई गई ताकि कापिज़ा सुचारु रूप से अपना अनुसंधान कार्य चला सकें। फलस्वरूप कापिज़ा कुछ ही समय उपरांत मास्को की भौतिकीय समस्या संस्था (इंस्टीट्यूट फ़ॉर फ़िज़िकल प्रॉब्लेम्स) के निर्देशक नियुक्त कर दिए गए।

आपका मुख्य कार्य 'चुंबकत्व' तथा क्रायोजेनिक्स (अत्यंत ठंडे ताप) से संबंध रखता है। आपने ३० टेस्ला तक का चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने में सफलता प्राप्त की और हाइड्रोजन तथा हीलियम के द्रवीकरण के प्लांट की भी सफल डिज़ाइन दी है।

पीटर ज़ीमान

पीटर ज़ीमान (Pieter Zeeman, १८६५ - १९४३) डच भौतिक वैज्ञानिक थे। 'ज़ेमान प्रभाव' के नाम से विख्यात, भौतिकी की महत्वपूर्ण खोज आपने सन् १८९६ में की थी जिसके लिये इन्हें सन १९०२ के भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

इनका जन्म हालैंड के ज़ोनेमी (Zonnemair, Zeeland) नगर में मई २५, सन् १८६५ को हुआ। प्रांरभिक शिक्षा-दीक्षा लाइडेन में हुई। वहीं पर क्रमश: भौतिक विज्ञान के सहायक एवं व्याख्याता पद पर सन् १८९० से १९०० तक कार्य किया। सन् १९०० में इनकी नियुक्ति ऐम्स्टरडम विश्वविद्यालय में भौतिकी के प्रोफेसर के पद पर हुई। वहीं पर सन् १८०८ में भौतिक संस्था के संचालक नियुक्त हुए।

चुंबकीय क्षेत्र में रखने पर परमाणु की अकेली स्प्रेक्ट्रमीय रेखा का अनेक रेखाओं में विभक्त हो जाना ज़ेमान प्रभाव कहलाता है। सर्वप्रथम इस खोज का सैद्धांतिक विश्लेषण लोरेंट्स (Lorentx) ने किया था। सूर्य एवं तारों में चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता इसी प्रभाव के द्वारा ज्योतिर्विदों ने मालूम की थी।

गतिमान ठोस माध्यमों में प्रकाश के वेग को भी ज़ेमान ने सफलतापूर्वक नापा था और इस दिशा में उन्होंने क्वार्ट्ज एवं फ्लिंट में फोटोग्राफी द्वारा महत्वपूर्ण प्रयोग किए थे।

ज़ेमान को अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए। ये अनेक विज्ञान समितियों के से संबंधित थे। सन् १९०२ में ज़ेमान तथा लोरेंट्स को भौतिकी में सम्मिलित नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ। चुंबक-प्रकाशिकी विज्ञान पर आपने अनेक पुस्तके लिखीं है और इन महत्वपूर्ण पुस्तकों का अंग्रेजी एवं जर्मन भाषाओं में अनुवाद किया गया है।

रघुनाथ मोहपात्रा

रघुनाथ मोहपात्रा (२४ मार्च १९४३-) को सन २००१ में भारत सरकार ने कला क्षेत्र में पद्म भूषण और २०१३ में ६४वें गणतंत्र के मौके पर पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। ये उड़ीसा से थे।

राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया)

प्रो॰ राजेन्द्र सिंह (२९ जनवरी १९२२ - १४ जुलाई २००३) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चौथे सरसंघचालक थे, जिन्हें सर्वसाधारण जन से लेकर संघ परिवार तक सभी जगह रज्जू भैया के नाम से ही जाना जाता है। वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय में १९३९ से १९४३ तक विद्यार्थी रहे। तत्पश्चात् १९४३ से १९६७ तक भौतिकी विभाग में पहले प्रवक्ता नियुक्त हुए, फिर प्राध्यापक और अन्त में विभागाध्यक्ष हो गये। रज्जू भैया भारत के महान गणितज्ञ हरीशचन्द्र के बी०एससी० और एम०एससी० (भौतिक शास्त्र) में सहपाठी थे।

सुमित्रा महाजन

सुमित्रा महाजन (जन्म: १२ अप्रैल १९४३) भारतीय राजनेत्री एवं भारत के सोलहवीं लोकसभा की अध्यक्ष हैं। वे इस पद पर आसीन होने वाली भारत की दूसरी महिला हैं। वे भारत के इन्दौर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी की सोलहवीं लोक सभा में सांसद हैं। वे इंदौर से लगातार वर्ष १९८९,१९९१, १९९६, १९९८, १९९९, २००४, २००९ एवं २०१४ में आठवीं बार सांसद बनी। इन्दौर में वे 'सुमित्रा ताई' (सुमित्रा दीदी) के नाम से प्रसिद्ध हैं।

हेनरिक पोंटोपिदां

हेनरिक पोंटोपिदां (1857-1943) स्वीडिश उपन्यासकार एवं कहानीकार थे। 1917 ई० में साहित्य में नोबेल पुरस्कार विजेता।

हेमू कालाणी

हेमू कालाणी (२३ मार्च, १९२३) भारत के एक क्रान्तिकारी एवं स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी थे। अंग्रेजी शासन ने उन्हें फांसी पर लटका दिया था।

१७ जुलाई

१७ जुलाई ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का १९८वॉ (लीप वर्ष में १९९वॉ) दिन है। वर्ष में अभी और १६७ दिन बाकी है।

२४ जनवरी

२४ जनवरी ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का २४वाँ दिन है। साल में अभी और ३४१ दिन बाकी हैं (लीप वर्ष में ३४२)।

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