१०१८

1018 ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है।

शताब्दी: 10वाँ शताब्दी - 11वाँ शताब्दी - 12वाँ शताब्दी
दशक: 980 का दशक  990का दशक  1000का दशक  - 1010 का दशक -  1020 का दशक  1030 का दशक  1040 का दशक
वर्ष: 1015 1016 1017 - 1018 - 1019 1020 1021

घटनाएँ

अक्टूबर-दिसंबर

जन्म

अक्टूबर-दिसंबर

निधन

अं-

अं- एक एस आई उपसर्ग है, इकाइयों के आगे लगकर जिसका अर्थ 1021 होता है। इसका चिह्न अं (Z) होता है।

मीली, सेन्टी, डेसी जैसा की मीलीमीटर, सेन्टीमीटर, डेसीमीटर, मीटर

मीली, सेन्टी, डेसी जैसा की मीलीलीटर, सेन्टीलीटर, डेसीलीटर, लीटर

मीली, सेन्टी, डेसी जैसा की मीलीग्राम, सेन्टीग्राम, डेसीग्राम, कीलोग्राम

अद-

अद- (मेगा) एक एस आई उपसर्ग है, इकाइयों के आगे लगकर जिसका अर्थ 106 होता है। इसका चिह्न अद (M) होता है।

सहस्रि, शति, दशि जैसा की सहस्रिमान, शतिमान, दशिमान, मान

सहस्रि, शति, दशि जैसा की सहस्रिप्रस्थ, शतिप्रस्थ, दशिप्रस्थ, प्रस्थ

सहस्रि, शति, दशि जैसा की सहस्रिधान्य, शतिधान्य, दशिधान्य, धान्य

अभिनंदननाथ

अभिनंदन जी वर्तमान अवसर्पिणी कल के चतुर्थ तीर्थंकर है।

अर्बि-

अर्बि- (नैनो) एक एस आई उपसर्ग है, इकाइयों के आगे लगकर जिसका अर्थ 10−9 होता है। इसका चिह्न इ (n) होता है।

ऋषभदेव

ऋषभदेव जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर हैं। तीर्थंकर का अर्थ होता है जो तीर्थ की रचना करें। जो संसार सागर (जन्म मरण के चक्र) से मोक्ष तक के तीर्थ की रचना करें, वह तीर्थंकर कहलाते हैं। ऋषभदेव जी को आदिनाथ भी कहा जाता है। भगवान ऋषभदेव वर्तमान अवसर्पिणी काल के प्रथम तीर्थंकर थे।

चन्द्रप्रभ

चंद्रप्रभ जी वर्तमान अवसर्पिणी काल के आठवें तीर्थंकर है|

जौनपुर जिला

जौनपुर भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश का एक जिला है। यह वाराणसी मंडल के अंतर्गत आता है और जिले का मुख्यालय जौनपुर शहर है।यहाँ पर 'भोजपुरी' हिन्दी तथा 'अवधी' भाषा का प्रचलन है।

पद्म (गणित)

पद्म- एक एस आई उपसर्ग है, इकाइयों के आगे लगकर जिसका अर्थ 1015 होता है। इसका चिह्न प (P) होता है।

सहस्रि, शति, दशि जैसा की सहस्रिमान, शतिमान, दशिमान, मान

सहस्रि, शति, दशि जैसा की सहस्रिप्रस्थ, शतिप्रस्थ, दशिप्रस्थ, प्रस्थ

सहस्रि, शति, दशि जैसा की सहस्रिधान्य, शतिधान्य, दशिधान्य, धान्य

पद्मप्रभ

पद्मप्रभ जी वर्तमान अवसर्पिणी काल के छठे तीर्थंकर है। कालचक्र के दो भाग है - उत्सर्पिणी और अवसर्पिणी। एक कालचक्र के दोनों भागों में २४-२४ तीर्थंकरों का जन्म होता है। वर्तमान अवसर्पिणी काल की चौबीसी के ऋषभदेव प्रथम और भगवान महावीर अंतिम तीर्थंकर थे।

पिको-

पिको- एक एस आई उपसर्ग है, इकाइयों के आगे लगकर जिसका अर्थ 10−12 होता है। इसका चिह्न p होता है।

फैम्टो-

फैम्टो- एक एस आई उपसर्ग है, इकाइयों के आगे लगकर जिसका अर्थ 10−15 होता है। इसका चिह्न f होता है।

यॉक्टो-

यॉक्टो- एक एस आई उपसर्ग है, इकाइयों के आगे लगकर जिसका अर्थ 10−24 होता है। इसका चिह्न y होता है।

शीतलनाथ

शीतलनाथ जी वर्तमान अवसर्पिणी काल के दसवें तीर्थंकर है।

सम्भवनाथ

सम्भवनाथ जिन वर्तमान अवसर्पिणी काल के तीसरे तीर्थंकर थे।

सुपार्श्वनाथ

सुपार्श्वनाथ जी वर्तमान अवसर्पिणी काल के सातवें तीर्थंकर थे|

सुमतिनाथ

सुमतिनाथ जी वर्तमान अवसर्पिणी काल के पांचवें तीर्थंकर थे। तीर्थंकर का अर्थ होता है जो तीर्थ की रचना करें। जो संसार सागर (जन्म मरण के चक्र) से मोक्ष तक के तीर्थ की रचना करें, वह तीर्थंकर कहलाते हैं।

सुविधिनाथ

तीर्थंकर सुविधिनाथ, जो पुष्पदन्त के नाम से भी जाने जाते हैं, वर्तमान अवसर्पिणी काल के ९वें तीर्थंकर है। इनका चिन्ह 'मगर' हैं।

१०१८ ईसा पूर्व

१०१८ ईसा पूर्व ईसा मसीह के जन्म से पूर्व के वर्षों को दर्शाता है। ईसा के जन्म को अधार मानकर उसके जन्म से १०१८ ईसा पूर्व या वर्ष पूर्व के वर्ष को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है। यह जूलियन कलेण्डर पर अधारित एक सामूहिक वर्ष माना जाता है। अधिकांश विश्व में इसी पद्धति के आधार पर पुराने वर्षों की गणना की जाती है। भारत में इसके अलावा कई पंचाग प्रसिद्ध है जैसे विक्रम संवत जो ईसा के जन्म से ५७ या ५८ वर्ष पूर्व शुरु होती है। इसके अलावा शक संवत भी प्रसिद्ध है। शक संवत भारत का प्राचीन संवत है जो ईसा के जन्म के ७८ वर्ष बाद से आरम्भ होता है। शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है।

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