सुलेमान

सुलेमान (९६१-९२२ ई. पू.) यहूदियों के राजा दाउद और बेथसाबे का पुत्र। अपनी माता, थाजक सादोक तथा नबी नायन के सम्मिलित प्रयास से सुलेमान अपने अग्रज अदोन्या का अधिकार अस्वीकार कराने में समर्थ हुए और वह स्वयं राजा बन गए।

सुलेमान ने यरुशलम का विश्वविख्यात मंदिर तथा बहुत से महल और दुर्ग बनवाए। उन्होंने व्यापार को भी प्रोत्साहन दिया। अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को सदृढ़ बना लेने के उद्देश्य से उन्होंने फराऊन की पुत्री के अतिरिक्त और बहुत सी विदेशी राजकुमारियों के साथ विवाह किया। वह कुशल प्रशासक थे। उन्होंने यरुशलेम के मंदिर को देश के धार्मिक जीवन का केंद्र बनाया और अनेक अन्य बातों में भी केंद्रीकरण को बढ़ावा दिया।

अपने निर्माण कार्यों के कारण उन्होंने प्रजा पर करों का अनुचित भार डाल दिया था जिससे उनकी मृत्यु के बाद विद्रोह हुआ और उनके राज्य के दो टुकड़े हो गए-

  • (१) उत्तर में इसराएल अथवा समारिया जो जेरोबोआम के शासन में आ गया और जिसमें दस वंश सम्मिलित हुए,
  • (२) दक्षिण में यूदा अथवा यरुसलेम, जिसमें दो वंश सम्मिलित थे और जो रोवोआप के शासन में आ गया।

परवर्ती पीड़ितों ने सुलेमान को आदर्श के रूप में देखकर उनको यहूदियों का सबसे प्रतापी राजा मान लिया है किंतु वास्तविकता यह है कि अत्यधिक केंद्रीकरण तथा करभार के कारण उनका राज्यकाल विफलता में समाप्त हुआ। उनके द्वारा निर्मित भवन उनकी ख्याति के एक मात्र आधार थे। वह अपनी बुद्धिमानी के लिए प्रसिद्ध हुए और इस कारण नीति, उपदेशक, श्रेष्ठ गीत, जैसे बाइबिल के अनेक परवर्ती प्रामाणिक ग्रंथों का श्रेय उनको दिया जाता था। कुछ अन्य प्रामाणिक ग्रंथ भी उनके नाम भी प्रचलित हैं।

अब्द अर-रहमान चतुर्थ

अब्द अर-रहमान चतुर्थ; 1018 ईस्वी में सुलेमान द्वितीय के उत्तराधिकारी और अल अन्डालुस (इबेरिया प्रायद्वीप) के अन्तिम कोर्डोबा उमय्यद खलीफा थे इनकी शासनकाल के दौरान एक युद्ध में हत्या करदी थी।

अमिताभ भट्टाचार्य

अमिताभ भट्टाचार्य बॉलीवुड फ़िल्मों में कार्यरत एक भारतीय गीतकार और पार्श्व गायक हैं। उनके गीतों को "फ्रिलफ्री" और "स्मार्टली वर्डेड" के रूप में वर्णित किये गए हैं।

इस्लामाबाद (ईरान)

इस्लामाबाद (फारसी:اسلام آبادغرب) ईरान में कर्मांशाह प्रांत का एक जिला है। इस जिले की जनसंख्या वर्ष २००६ अनुसार है।

ईज़ेह

ईज़ेह (फारसी:ايذه) ईरान में खुज़ेस्तान प्रांत का एक जिला है। इस जिले की जनसंख्या वर्ष २००५ अनुसार १,२९,१०५ है।

ईरान के शहर

यह ईरान के शहरों की सूची है।

ओरुमिये

अबादेह (फारसी:اروميه) ईरान में पश्चिम अज़रबैजान प्रांत का एक जिला है। इस जिले की जनसंख्या वर्ष २००६ अनुसार ५८३,२५५ है।

कर्मान

कर्मान (फारसी: كرمان) ईरान में कर्मान प्रांत का एक शहर है। इस शहर की जनसंख्या वर्ष २००६ अनुसार ५१५,११४ है।

कल्याण मल्ल

कल्याण मल्ल () 16वीं शताब्दी में पूर्वी उत्तर प्रदेश में शासन कर रहे लोदी युवराज लाड खान के दरबार के प्रिय लेखक थे। उन्होनें संस्कृत में 'सुलेमान चरित' नामक ग्रन्थ की रचना की है जिसमें इस्लामी और इसाई कथाओं का संकलन है। उनकी दूसरी रचना 'अनंगरंग' नामक कामशास्त्रीय ग्रन्थ है। अनंगरंग और सुलेमान चरित ये दोनों रचनाएं उनके संरक्षक युवराज को समर्पित हैं।

खुमायनीशहर

खुमायनीशहर (फारसी: خمينى شهر) ईरान में इस्फ़हान प्रांत का एक शहर है। इस शहर की जनसंख्या वर्ष २००६ अनुसार २२३,०७१ है।

बलोच भाषा और साहित्य

बलोची या बलोच भाषा (بلوچی‎) दक्षिण-पश्चिमी पाकिस्तान, पूर्वी ईरान और दक्षिणी अफ़्ग़ानिस्तान में बसने वाले बलोच लोगों की भाषा है। यह ईरानी भाषा परिवार की सदस्य है और इसमें प्राचीन अवस्ताई भाषा की झलक नज़र आती है, जो स्वयं वैदिक संस्कृत के बहुत करीब मानी जाती है। उत्तरपश्चिम ईरान, पूर्वी तुर्की और उत्तर इराक़ में बोले जानी कुर्दी भाषा से भी बलोची भाषा की कुछ समानताएँ हैं। बलोची पाकिस्तान की नौ सरकारी भाषाओँ में से एक है। अनुमानतः इसे पूरे विश्व में लगभग ८० लाख लोग मातृभाषा के रूप में बोलते हैं।

पाकिस्तान में इसे अधिकतर बलोचिस्तान प्रान्त में बोला जाता है, लेकिन कुछ सिंध और पंजाब में बसे हुए बलोच लोग भी इसे उन प्रान्तों में बोलते हैं। ईरान में इसे अधिकतर सिस्तान व बलुचेस्तान प्रान्त में बोला जाता है। ओमान में बसे हुए बहुत से बलोच लोग भी इसे बोलते हैं। समय के साथ बलोची पर बहुत सी अन्य भाषाओँ का भी प्रभाव पड़ा है, जैसे की हिन्दी-उर्दू और अरबी। पाकिस्तान में बलोची की दो प्रमुख शाखाएँ हैं: मकरानी (जो बलोचिस्तान से दक्षिणी अरब सागर के तटीय इलाक़ों में बोली जाती है) और सुलेमानी (जो मध्य और उत्तरी बलोचिस्तान के सुलेमान श्रृंखला के पहाड़ी इलाक़ों में बोली जाती है)। ईरान के बलुचेस्तान व सिस्तान सूबे में भी इसकी दो उपशाखाएँ हैं: दक्षिण में बोले जानी वाली मकरानी (जो पाकिस्तान के बलोचिस्तान की मकरानी से मिलती है) और उत्तर में बोले जानी वाली रख़शानी।

मस्जिद-ए-सुलेमान

मस्जिद-ए-सुलेमान (फारसी: مسجدسليمان) ईरान का शहर है। यह शहर खुज़ेस्तान प्रांत में आता है

इस जिले की जनसंख्या 108,682 (गणना वर्ष २००६ अनुसार) है

मुहम्मद द्वितीय कोर्डोबा

मुहम्मद द्वितीय अल-महंदी; Mohammed II al-Mahdi, कोर्डोबा, स्पेन के चौथे खलीफा, अल-अंदलुस (मूरिश इबेरिया) में उमय्याद वंश से थे। 7,000 सैनिकों की अपनी सेना को तोड़ने के बाद, वह अपने कई विषयों के विरोध का स्रोत बन गए थे। अल-महदी ने सुलेमान द्वितीय के राजनीतिक प्रतिद्वंदी के रूप में उभरने के बाद खलीफा के रूप में अपना खिताब बचाव करने की मांग की। एक अशांत शासन के बाद, जिसमें अल-मह्दी को उत्खनन करने के प्रयास में कई युद्धरत गुट सत्ता में उठे, उन्हें अंततः पद से हटा दिया गया। उनकी मृत्यु के बाद, कई मुस्लिम इतिहासकारों ने उन पर अमीर्ड हरेम की पवित्रता को नष्ट करने का आरोप लगाया।।.

सनंदज

सनंदज (फारसी: سنندج) ईरान का शहर है। यह शहर कुर्देस्तान प्रांत में आता है

इस जिले की जनसंख्या 316,862 (गणना वर्ष २००६ अनुसार) है

सलीम-सुलेमान

सलीम और सुलेमान हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध संगीत निर्देशक और गायक हैं। यह एक दो भाइयों की जोड़ी है जिसमे, सलीम मर्चेंट और सुलेमान मर्चेंट शामिल हैं। सलीम और सुलेमान पिछले एक दशक से अधिक से फिल्मों के लिए संगीत रचना कर रहे हैं, इनकी प्रसिद्ध फिल्मों मे शामिल हैं, चक दे! इंडिया, भूत, मुझसे शादी करोगी, मातृभूमि और फैशन।

एक प्रदर्शन में सलीम-सुलेमान]]

इस जोड़ी ने कई भारतीय पॉप बैंड के लिए भी संगीत तैयार किया है जिनमें वीवा, आसमां, श्वेता शेट्टी, जैस्मीन और स्टाइल भाई आदि शामिल हैं। इन्होने कई टीवी विज्ञापनों का निर्माण और संगीत निर्देशन किया है जिसमे इनका सहयोग उस्ताद जाकिर हुसैन और उस्ताद सुल्तान खान जैसे कलाकारों ने किया है। इन्हें इनका पहला मौका करण जौहर ने अपनी फिल्म काल की संगीत रचना करने के लिए दिया था। उसके बाद, इन्होने कई बड़े निर्माताओं और निर्देशक जैसे यश चोपड़ा, सुभाष घई और राम गोपाल वर्मा के साथ फिल्में की हैं। गीत संगीत रचना से पहले, वे फिल्मों मे पार्श्व संगीत रचना करते रहे हैं। कुछ डरावनी फिल्मों में उनका पार्श्व संगीत बहुत पसंद किया गया।.

सलीम-सुलेमान]]

सलीम मर्चेंट , प्रीतम चक्रवर्ती, सुलेमान मर्चेंट एक साथ]]

सलीम द्वितीय

सलीम द्वितीय (उस्मानी तुर्कीयाई: سليم ثانى सेलिम-इ सानी, तुर्कीयाई: II.Selim; 28 मई 1524 – 12/15 दिसम्बर 1574), सार्होश सेलिम, मेश्त सेलिम (Sarhoş Selim; Mest Selim - शराबी सलीम) या सारे सेलिम (Sarı Selim - सुनहरे बालों का सलीम) के नामों से भी मशहूर हैं, 1566 से 1574 में उनकी मौत तक उस्मानिया साम्राज्य के सुल्तान रहे। वे शानदार सुलेमान और ख़ासकी ख़ुर्रम सुल्तान के पुत्र थे। सलीम उस्मानी तख़्त के लिए उम्मीदवार नहीं थे। जब उनके भाई शहज़ादे महमद की मौत चेचक की वजह से हुई, उनके सौतेले भाई शहज़ादे मुस्तफ़ा को उनके पिता के हुकम पर गला घोंटने से मार दिया गया और उनके भाई शहज़ादे बायज़ीद को उनके और उनके पिता द्वारा रचित साज़िश में मार दिया गया था; तब उनके पिता के गुज़रने के बाद वे साम्राज्य के आख़री जीवित वारिस थे। 1566 में शानदार सुलेमान के देहांत के बाद उनकी मौत की ख़बर 50 रोज़ तक जनता से छुपाई गई जिसके बाद सलीम द्वितीय क़ुस्तुंतुनिया में तख़्त नशीन हुआ। उस वक़्त उनकी उम्र 42 साल थी। उस्मानिया साम्राज्य उस वक़्त अपना चरम उत्कर्ष पर पहुँच चुका था।

सुलेमान इब्न अब्द अल-मालिक

सुलेमान इब्न अब्द अल मालिक; Sulayman bin Abd al-Malik, (अरबी: سليمان بن عبد الملك‎) (674 – 22 ‏सितम्बर 717), एक उमय्यद खलीफा थे जिन्होने 715 से 715 ईस्वी तक शासन किया इनके पिता अब्द अल मालिक इब्न मरवान थे और अपने पुर्वधिकारी अल-वालिद प्रथम के छोटे भाई थे।

सुलेमान इब्न अल-हाकम

सुलेमान द्वितीय इब्न अल-हाकम, और सुलेमान अल-मस्ताइन; Sulayman II ibn al-Hakam (or Sulayman al-Musta'in), कोर्डोबा के पाँचवें उमय्यद खलीफा थे जिन्होने 1009 से 1013 के बीच और 1013 से 1016 ईस्वी तक अल अन्डालुस (इबेरिया प्रायद्वीप) पर शासन किया था।

सुलेमान द्वितीय

सुलेमान द्वितीय (15 अप्रैल 1642 – 22/23 जून 1691) (उस्मानी तुर्कीयाई: سليمان ثانى सुलेमान-इ स्आनी) 1687 से 1691 तक उस्मानी साम्राज्य के सुल्तान रहे। सैन्य कार्रवाई में इन्हें तख़्त पर बिठाया गया। सुलेमान और उनके वज़ीर-ए-आज़म कोप्रुलु फ़ाज़िल मुस्तफ़ा पाशा पवित्र लीग की शक्तियों के ख़िलाफ़ युद्ध में उस्मानियों के पराजित होने के सिलसिले को समाप्त करने में काफ़ी सफल रहे थे। 1690 में उस्मानियों ने फिर से बलग़राद पर क़ब्ज़ा किया और शहरी प्रशासन में कई वित्तीय और सैन्य सुधार लाए गए।

सुलेमान प्रथम

सुलेमान प्रथम, सुलेमान क़ानूनी, सुलेमान महान या शानदार सुलेमान (उस्मानी तुर्की: سلطان سليمان اول‎ सुल्तान सुलेमान अव्वल, आधुनिक तुर्की: Süleyman I या Kanunî Sultan Süleyman) उस्मानी सल्तनत के दसवें शासक थे जिन्होंने 1520 से 1566, 46 साल तक शासन किया। वे सम्भवतः उस्मानी सल्तनत के सबसे महान शासकों में से एक थे जिन्होंने अपने अनोखी न्यायप्रणाली और अतुलनीय प्रबन्धन की बदौलत समस्त इस्लामी विश्व को समृद्धि और विकास का मार्ग पर लाया था। उन्होंने सल्तनत के लिए क़ानून की विशेष व्यवस्था स्थापित की थी और इस कारण से उन्हें सुलेमान क़ानूनी के नाम से याद किया जाता है। पश्चिमी विश्व उनकी महानता से इतने प्रभावित हुए कि पश्चिमी लेखकों ने उन्हें शानदार सुलेमान का नाम दिया।

उनकी सरकार के मुख्य इलाक़ों में हिजाज़, तुर्की, मिस्र, अल्जीरिया, इराक़, कुर्दिस्तान, यमन, शाम, फ़ारस की खाड़ी और भूमध्य तटीय क्षेत्र, यूनान और हंगरी शामिल थे।

१३९८ हरिद्वार महाकुम्भ नरसंहार

महाकुम्भ, भारत का एक प्रमुख धार्मिक उत्सव है। वार्षिक कुम्भ का आयोजन प्रतिवर्ष किया जाता है लेकिन प्रति १२ वर्षों में आयोजित किए जाने वाले महाकुम्भ को देश में चार विभिन्न स्थानों पर आयोजित किया जाता है। इनमें से एक स्थान है हरिद्वार जहाँ पर जनवरी से अप्रैल २०१० तक महाकुम्भ मेला लगा था।

यद्यपि हरिद्वार में लगने वाला यह मेला बहुत लोकप्रिय है और इसमे भागीदारी करने के लिए देश-विदेश से करोड़ो लोग आते हैं लेकिन विश्व-प्रचलित हरिद्वार महाकुम्भ के साथ इतिहास का एक दुखदाई पहलू भी जुड़ा हुआ है। यह दुखदाई पहलू है, सन १३९८ में मुस्लिम शासक तैमूर द्वारा हरिद्वार में एकत्रित हुए श्रद्धालुओं का बड़े पैमाने पर हुआ नरसंहार।

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