बाढ़

भारत विश्व का दूसरा बाढ़ प्रभावित देश है। बाढ़ एक ऐसी स्थिति है जिसमें कोई निश्चित भूक्षेत्र अस्थायी रूप से जलमग्न हो जाता है और जन-जीवन प्रभावित हो जाता है। बाँध टूटना, जलतरंगों की गति बढ़ना, मानसून की अधिकता आदि। भौतिक हानि (इमारतों व घरों का जलमग्न होना) जन स्वास्थ्य को नुकसान (बाढ़ में बीमारी फैलने का खतरा) फसलों और खाद्यान्न पूर्ति पर प्रभाव बचाव के कुछ उपाय 1. बहुउद्देशीय भूस्खलन शिविर 2इंजीनियर द्वारा स्वीकृत ढाँचे (इमारतें)

अपने परिवेश को जाने

  • नये इलाके में आने पर निची जगहों का पता लगाये।
  • पहले से ही स्थानीय ऊंची इलाके की और भागने का रस्ता सोच के रखें। कुछ रास्ते बन्द हो सकते हैं, कृपया एकाधिक रस्ता सोच के रखें।
  • आपातकालीन सेवायें - पुलिस, अस्पताल और फायर ब्रिगेड (दमकल विभाग) का फोन नम्बर अपने पास रखे और घरवालों के पास भी रखे।

कुछ सामान घर पर इक्ठटा रखें

१) अगर आप ऐसे इलाके में रहते हैं जहां बाढ़ की सम्भावना होतो पहले से आपातकालीन निर्माण वस्तुओ को इक्ठटा करें।

जैसे -
    • प्लावुड
    • प्लास्टिक/टार्पौलिन
    • काठ
    • कीला
    • हथौड़ा
    • आरी
    • बेलचा/खुरपा,
    • बाली से भरा बोरा, इत्यादि।

२) आपातकालीन स्तिथिओं के लिये कुछ सामान अपने पास थैली में रखें

जैसे -
    • टार्च और अतिरिक्त बैटरियाँ (सेल)
    • बैटरी-चालित रैडियो/ट्रान्सिस्टर और अतिरिक्त बैटरियां (सेल)
    • बैन्डेज़, गौज़, कटने-जलने की दवा
    • पेट खराब, बुखार, दर्द इत्यादि की दवा (और जो दवा घर के कोइ सदस्य को नियमित लेना पड़ता है)
    • पीने की पानी की बोतल (हर आदमी तथा औरत को हर दिन तीन लीटर पानी लगता है)
    • खाने का समान
    • पैसे

३) अपने ज़रूरी कागज़ात इकट्ठा रखे।

४) घर के बाढ़ बीमा करवायें और बीमा के कागज़ भी साथ रखें।

५) घर के कीमती सामान (फ्रीज़, टीवी) की सूची बनाये और उनके तस्वीरे भी खीचके रखें।

अपने घर को सुरक्षित बनाये

  • घर के पहली मंज़िल के दीवारों के लिये उन्हे जल-रोधक केमिकल से सील करे
  • घर के गन्दे पानी की ड्रेन में वाल्व लगवाये ताकि बाढ़ की पानी वहां से घर में न घुसे। आपातकालीन स्थिति में आप रबर कि गेंद इस्तमाल कर सकते हैं।
  • घर के गीजर, फर्नेस और स्विच/प्लग पायन्ट कमरे के ऊपरी हिस्से में लगवाये।

अपने परिवारवालों को आपातकालीन स्थिति के लिये तैयार करें

  • आफ़त आने पर यह सम्भव है कि आप और आपके घरवाले दफ्तर/कर्मस्थल/पाठशाला में फंस जायें।
  • इस स्थिति में दूसरे शहर में रहने वाले दोस्त/रिश्तेदार को पहले से 'सम्पर्क-व्यक्ति' निर्णय कर के रखें।
    • आपातकालीन स्तिथि में अक्सर दूर की टेलिफोन (एस.टी.डी) लायने काम करती है, पर स्थानिय (लोकल) फोन नहीं चलते।
    • यह ज़रूर जाँच ले कि घर में सबको इस व्यक्ति का नाम, पता और टेलिफोन नम्बर पता है।
  • बिजली, पानी और गैस के लाइने बन्ध करना सीखे और घर में सबको सीखाये। बाढ़ में इन्हे बन्ध करना आवश्यक हो सक्ता है।

पंचमेल

  • गाड़ी की टैन्क में पेट्रोल तथा डीजल हमेशा भर कर रखने की कोशिश करे। बाढ़ के समय अक्सर पम्प बन्द रहते हैं।

बाहरी कड़ियाँ

यह भी देखिये

अथमलगोला प्रखण्ड (पटना)

अथमलगोला पटना, बिहार का एक प्रखण्ड है।

अररिया जिला

अररिया भारत गणराज्य के बिहार प्रान्त में स्थित एक शहर एवं जिला है। अररिया जिला बिहार राज्य, भारत के अड़तीस जिलों में से एक है और अररिया शहर इस जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है। अररिया जिले पूर्णिया प्रमंडल का एक हिस्सा है। जिले में 2830 वर्ग किमी क्षेत्र का क्षेत्रफल है। यहाँ से पर्वत कचनजंगा (हिमालयन रेंज के महान चोटियों में से एक) का दृश्य देखा जा सकता है| इस जिले में कुल 2 उपखंड अररिया और फारबिसगंज एवं 9 प्रखंड हैं । अररिया उपखंड में छह प्रखंड अररिया, जोकीहाट, कुर्साकांटा, रानीगंज, सिकटी और पलासी एवं फारबिसगंज उपखंड में तीन प्रखंड फारबिसगंज, नरपतगंज और भरगामा हैं । इस जिले में छह विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं: नरपतगंज, रानीगंज (अ० जा०), फारबिसगंज, अररिया, जोकीहाट और सिकटी। ये सभी अररिया लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा हैं।

असम

असम या आसाम उत्तर पूर्वी भारत में एक राज्य है। असम अन्य उत्तर पूर्वी भारतीय राज्यों से घिरा हुआ है। असम भारत का एक सीमांत राज्य है जो चतुर्दिक, सुरम्य पर्वतश्रेणियों से घिरा है। यह भारत की पूर्वोत्तर सीमा २४° १' उ॰अ॰-२७° ५५' उ॰अ॰ तथा ८९° ४४' पू॰दे॰-९६° २' पू॰दे॰) पर स्थित है। संपूर्ण राज्य का क्षेत्रफल ७८,४६६ वर्ग कि॰मी॰ है। भारत - भूटान तथा भारत - बांग्लादेश सीमा कुछ भागो में असम से जुडी है। इस राज्य के उत्तर में अरुणाचल प्रदेश, पूर्व में नागालैंड तथा मणिपुर, दक्षिण में मिजोरम तथा मेघालय एवं पश्चिम में बंग्लादेश स्थित है।

इडुक्की जिला

इडुक्की ज़िला भारत के केरल राज्य का एक ज़िला है। ज़िले का मुख्यालय पाइनावु है। सन् 2018 मेंं केरल मेंं सौ साल की सबसे भीषण बाढ़ आयी थी, जिसमेंं इडुक्की जिला सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था। इस जिले की सीमा समुद्र तट से नहींं लगती हैं। ज़िले का अधिकतर भूक्षेत्र पश्चिमी घाट में स्थित है और इसका अधिकांश भाग वन से ढका हुआ है।

उत्तर भारत

उत्तरी भारत में अनेक भौगोलिक क्षेत्र आते हैं। इसमें मैदान, पर्वत, मरुस्थल आदि सभी मिलते हैं। यह भारत का उत्तरी क्षेत्र है। प्रधान भौगोलिक अंगों में गंगा के मैदान और हिमालय पर्वतमाला आती है। यही पर्वतमाला भारत को तिब्बत और मध्य एशिया के भागों से पृथक करती है। उत्तरी भारत मौर्य, गुप्त, मुगल एवं ब्रिटिश साम्राज्यों का ऐतिहासिक केन्द्र रहा है। यहां बहुत से हिन्दू तीर्थ जैसे पर्वतों में गंगोत्री से लेकर मैदानों में वाराणासी तक हैं, तो मुस्लिम तीर्थ जैसे अजमेर[ आदि भि हैं। यहां विश्व धरोहर स्थल भी अनेक हैं, जैसे महाबोधि मंदिर, हुमायुं का मकबरा और सर्वश्रेष्ठ ताजमहल। भारत सरकार द्वारा परिभाषित उत्तरी और उत्तर-मध्य क्षेत्र में जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार तथा मध्य प्रदेश राज्य आते हैं। यहां के प्रमुख शहरों में नई दिल्ली, कानपुर, जयपुर, लखनऊ, इंदौर, लुधियाना, चंडीगढ़ आदि आते हैं। यहां बोली जाने वाली प्रमुख भाषाएं हैं हिन्दी, पंजाबी, कश्मीरी, डोगरी, उर्दु, अवधी, मैथिली, अंग्रेज़ी।

यहां के मैदान सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों द्वारा बहाकर लाए गए जलोढ़ निक्षेप से बना है। इस मैदान की पूर्व से पश्चिम लंबाई लगभग 3200 किलो मीटर है। इसकी औसत चौड़ाई 150 से 300 किलोमीटर है। जलोढ़ निक्षेप की अधकतम गहराई 1000 से 2000 मीटर है। उत्तर से दक्षिण दिशा में इन मैदानों को तीन भागों में बाँट सकते हैं भाभर, तराई और जलोढ़ मैदान। जलोढ़ मैदान को आगे दो भागों में बाँटा जाता है- खादर और बाँगर। भाभर 8 से 10 किलोमीटर चौड़ाई की पतली पट्टी है जो शिवालिक गिरिपाद के समानांतर फैली हुई है। उसके परिणामस्वरूप हिमालय पर्वत श्रेणियों से बाहर निकलती नदियाँ यहाँ पर भारी जल-भार, जैसे- बड़े शैल और गोलाश्म जमा कर देती हैं और कभी-कभी स्वयं इसी में लुप्त हो जाती हैं। भाभर के दक्षिण में तराई क्षेत्र है जिसकी चौड़ाई 10 से 20 किलोमीटर है। भाभर क्षेत्र में लुप्त नदियाँ इस प्रदेश में ध्रातल पर निकल कर प्रकट होती हैं और क्योंकि इनकी निश्चित वाहिकाएँ नहीं होती, ये क्षेत्र अनूप बन जाता है, जिसे तराई कहते हैं। यह क्षेत्र प्राकॄतिक वनस्पति से ढका रहता है और विभिन्न प्रकार के वन्य प्राणियों का घर है। तराई से दक्षिण में मैदान है जो पुराने और नए जलोढ़ से बना होने के कारण बाँगर और खादर कहलाता है।

इस मैदान में नदी की प्रौढ़ावस्था में बनने वाली अपरदनी और निक्षेपण स्थलाकॄतियाँ, जैसे- बालू-रोधका, विसर्प, गोखुर झीलें और गुंफित नदियाँ पाई जाती हैं। ब्रह्मपुत्र घाटी का मैदान नदीय द्वीप और बालू-रोधकाओं की उपस्थिति के लिए जाना जाता है। यहाँ ज्यादातर क्षेत्र में समय पर बाढ़ आती रहती है और नदियाँ अपना रास्ता बदल कर गुंफित वाहिकाएँ बनाती रहती हैं। उत्तर भारत के मैदान में बहने वाली विशाल नदियाँ अपने मुहाने पर विश्व के बड़े-बड़े डेल्टाओं का निर्माण करती हैं, जैसे- सुंदर वन डेल्टा। सामान्य तौर पर यह एक सपाट मैदान है जिसकी समुद्र तल से औसत ऊँचाई 50 से 100 मीटर है। हरियाणा और दिल्ली राज्य सिंधु और गंगा नदी तंत्रों के बीच जल-विभाजक है। ब्रह्मपुत्र नदी अपनी घाटी में उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहती है। परंतु बांग्लादेश में प्रवेश करने से पहले धुबरी के समीप यह नदी दक्षिण की ओर 90° मुड़ जाती है। ये मैदान उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी से बने हैं। जहाँ कई प्रकार की फसलें, जैसे-गेहूँ, चावल, गन्ना और जूट उगाई जाती हैं। अत: यहाँ जनसंख्या का घनत्व ज्यादा है।

कानपुर देहात जिला

रमाबाई नगर भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश का एक जिला है। जिले का मुख्यालय माती (अकबरपुर) है। वर्ष १९७७ में कानपुर जिले को दो भागों (कानपुर नगर तथा 'कानपुर देहात') में विभाजित कर दिया गया। १९७९ में पुनः दोनो को मिला दिया गया किन्तु १९८१ में पुनः विभाजन किया गया। १ जुलाई २०१० को इसका नाम बदलकर 'रमाबाई नगर जिला' कर दिया गया जिसे २०१२ में फिर से 'कानपुर देहात' कर दिया गया।

कुल्लू-मनाली विमानक्षेत्र

कुल्लू-मनाली विमानक्षेत्र (आईएटीए: KUU, आईसीएओ: VIBR) (अन्य नाम: कुल्लु मनाली हवाई अड्डा, भुन्तर विमानक्षेत्र) हिमाचल प्रदेश स्थित सीमित सुविधायुक्त हवाईअड्डा है। भुन्तर हवाई अड्डा विमानचालकों के लिये एक चुनौती भारा अवतरण होता है, क्योंकि यहां की उड़ानपट्टी एक गहरी घाटी में बनी है, जिसको कई हजार फ़ीट ऊंचे पर्वत शिखर घेरे हुए हैं। विमानक्षेत्र के निकट ही व्यास नदी भी बहती है जिससे १९९५ में उत्पन्न बाढ़ ने इस हवाई अड्डे को खतरे की स्थिति में ला दिया था। भुन्तर में नये विमान टर्मिनल भवन का उद्घाटन २००८ में ही हुआ था। इसके साथ ही यहाम के एप्रन में एक साथ दो विमानों की पार्किंग सुविधा हो गयी है। यहां किंगफ़िशर एयरलाइंस ने सितम्बर २०१२ में अपनी सुविधाओं को विराम दे दिया था लेकिन एयर इण्डिया क्षेत्रीय ने अपनी वायु सेवाओं को कुल्लू में मई २०१३ से पुनरारम्भ कर दिया था। डेक्कन चार्टर्स ने हिमालयन बुल्स के साथ कुल्लु-चण्डीगढ़-कुल्लु शटल सेवाएं २ अप्रैल २०१४ से आरम्भ की हैं।

खगड़िया जिला

खगड़िया ज़िला भारत के बिहार राज्य का एक ज़िला है। ज़िले का मुख्यालय खगड़िया है।

गण्डकी नदी

गण्डकी नदी, नेपाल और बिहार में बहने वाली एक नदी है जिसे बड़ी गंडक या केवल गंडक भी कहा जाता है। इस नदी को नेपाल में सालिग्रामि या सालग्रामी और मैदानों मे नारायणी और सप्तगण्डकी कहते हैं। यूनानी के भूगोलवेत्ताओं की कोंडोचेट्स (Kondochates) तथा महाकाव्यों में उल्लिखित सदानीरा भी यही है।

गण्डकी हिमालय से निकलकर दक्षिण-पश्चिम बहती हुई भारत में प्रवेश करती है। त्रिवेणी पर्वत के पहले इसमें एक सहायक नदी त्रिशूलगंगा मिलती है। यह नदी काफी दूर तक उत्तर प्रदेश तथा बिहार राज्यों के बीच सीमा निर्धारित करती है।

उत्तर प्रदेश में यह नदी महराजगंज और कुशीनगर ज़िलों से होकर बहती है। बिहार में यह चंपारन, सारन और मुजफ्फरपुर जिलों से होकर बहती हुई १९२ मील के मार्ग के बाद पटना के संमुख गंगा में मिल जाती है। इस नदी की कुल लम्बाई लगभग १३१० किलोमीटर है।

विगलित हिम द्वारा वर्ष भर पानी मिलते रहने से यह सदावाही बनी रहती है। वर्षा ऋतु में इसकी बाढ़ समीपवर्ती मैदानों को खतरे में डाल देती है क्योंकि उस समय इसका पाट २-३ मील चौड़ा हो जाता है। बाढ़ से बचने के लिए इसके किनारे बाँध बनाए गए हैं। यह नदी मार्ग-परिवर्तन के लिए भी प्रसिद्ध है। इस नदी द्वारा नेपाल तथा महराजगंज के जंगलों से लकड़ी के लट्ठों का तैरता हुआ गट्ठा निचले भागों में लाया जाता है और उसी मार्ग से अनाज और चीनी भेजी जाती है। त्रिवेणी तथा सारन जिले की नहरें इससे निकाली गई हैं, जिनसे चंपारन और सारन जिले में सिंचाई होती है।

चक बाढ़ गाँव, हंडिया (इलाहाबाद)

चक बाढ़ भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के इलाहाबाद जिले के हंडिया प्रखण्ड में स्थित एक गाँव है।

दामोदर नदी

दामोदर पश्चिम बंगाल तथा झारखंड में बहने वाली एक नदी है। इस नदी के जल से एक महत्वाकांक्षी पनबिजली परियोजना दामोदर घाटी परियोजना चलाई जाती है जिसका नियंत्रण डी वी सी करती है।

दामोदर नदी झारखण्ड के छोटा नागपुर क्षेत्र से निकलकर पश्चिमी बंगाल में पहुँचती है। हुगली नदी के समुद्र में गिरने के पूर्व यह उससे मिलती है। इसकी कुल लंबाई ३६८ मील है। इस नदी के द्वारा २,५०० वर्ग मील क्षेत्र का जलनिकास होता है। पहले नदी में एकाएक बाढ़ आ जाती थी जिससे इसको 'बंगाल का अभिशाप' कहा जाता था। भारत के प्रमुख कोयला एवं अभ्रक क्षेत्र भी इसी घाटी में स्थित हैं। इस नदी पर बाँध बनाकर जलविद्युत् उत्पन्न की जाती है। कुनर तथा बराकर इसकी सहायक नदियाँ हैं।

पूर्णिया प्रमंडल

पूर्णिया भारत के बिहार प्रान्त का एक प्रमंडल है। इसके अंतर्गत अररिया, कटिहार, किशनगंज और पूर्णिया जिले आते हैं।

बाँध

बाँध एक अवरोध है जो जल को बहने से रोकता है और एक जलाशय बनाने में मदद करता है। इससे बाढ़ आने से तो रुकती ही है, जमा किये गया जल सिंचाई, जलविद्युत, पेय जल की आपूर्ति, नौवहन आदि में भी सहायक होती है।

बाढ प्रखण्ड (पटना)

बाढ पटना, बिहार का एक प्रखण्ड है।

ब्रह्मपुत्र नदी

ब्रह्मपुत्र (असमिया - ব্ৰহ্মপুত্ৰ, बांग्ला - ব্রহ্মপুত্র) एक नदी है। यह तिब्बत, भारत तथा बांग्लादेश से होकर बहती है। ब्रह्मपुत्र का उद्गम हिमालय के उत्तर में तिब्बत के पुरंग जिले में स्थित मानसरोवर झील के निकट होता है, जहाँ इसे यरलुंग त्संगपो कहा जाता है। तिब्बत में बहते हुए यह नदी भारत के अरुणांचल प्रदेश राज्य में प्रवेश करती है। आसाम घाटी में बहते हुए इसे ब्रह्मपुत्र और फिर बांग्लादेश में प्रवेश करने पर इसे जमुना कहा जाता है। पद्मा (गंगा) से संगम के बाद इनकी संयुक्त धारा को मेघना कहा जाता है, जो कि सुंदरबन डेल्टा का निर्माण करते हुए बंगाल की खाड़ी में जाकर मिल जाती है।ब्रह्मपुत्र की लंबाई लगभग 2900 किलोमीटर है। ब्रह्मपुत्र का नाम तिब्बत में सांपो, अरुणाचल में डिहं तथा असम में ब्रह्मपुत्र है। ब्रह्मपुत्र नदी बांग्लादेश की सीमा में जमुना के नाम से दक्षिण में बहती हुई गंगा की मूल शाखा पद्मा के साथ मिलकर बंगाल की खाड़ी में जाकर मिलती है। सुवनश्री, तिस्ता, तोर्सा, लोहित, बराक आदि ब्रह्मपुत्र की उपनदियां हैं। ब्रह्मपुत्र के किनारे स्थित शहरों में डिब्रूगढ़, तेजपुर एंव गुवाहाटी प्रमुख हैं

प्रायः भारतीय नदियों के नाम स्त्रीलिंग में होते हैं पर ब्रह्मपुत्र एक अपवाद है। संस्कृत में ब्रह्मपुत्र का शाब्दिक अर्थ ब्रह्मा का पुत्र होता है।

मानसून

अब ITCZ(उष्ण कटिबंधीय संरक्षित क्षेत्र)से जब व्यापारिक एवं समाॅगी हवाये ऊपर की ओर कोरियोलिस बल के कारण भारत के राज्य केरल मे 2महिना 10दिन मे मानसून पहुंचता है जो कि यहां सबसे पहले सबसे बाद मे भी मानसून यही होता है

लेकिन भारत मे सबसे ज्यादा मानसून मासिनराम(मेघालय) मे होती है जो कि वहा पर औषतन बरसात 11873मिमी॰ की होती है ।

मानसून मूलतः हिन्द महासागर एवं अरब सागर की ओर से भारत के दक्षिण-पश्चिम तट पर आनी वाली हवाओं को कहते हैं जो भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि में भारी वर्षा करातीं हैं। ये ऐसी मौसमी पवन होती हैं, जो दक्षिणी एशिया क्षेत्र में जून से सितंबर तक, प्रायः चार माह सक्रिय रहती है। इस शब्द का प्रथम प्रयोग ब्रिटिश भारत में (वर्तमान भारत, पाकिस्तान एवं बांग्लादेश) एवं पड़ोसी देशों के संदर्भ में किया गया था। ये बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से चलने वाली बड़ी मौसमी हवाओं के लिये प्रयोग हुआ था, जो दक्षिण-पश्चिम से चलकर इस क्षेत्र में भारी वर्षाएं लाती थीं। हाइड्रोलोजी में मानसून का व्यापक अर्थ है- कोई भी ऐसी पवन जो किसी क्षेत्र में किसी ऋतु-विशेष में ही अधिकांश वर्षा कराती है। यहां ये उल्लेखनीय है, कि मॉनसून हवाओं का अर्थ अधिकांश समय वर्षा कराने से नहीं लिया जाना चाहिये। इस परिभाषा की दृष्टि से संसार के अन्य क्षेत्र, जैसे- उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, उप-सहारा अफ़्रीका, आस्ट्रेलिया एवं पूर्वी एशिया को भी मानसून क्षेत्र की श्रेणी में रखा जा सकता है। ये शब्द हिन्दी व उर्दु के मौसम शब्द का अपभ्रंश है। मॉनसून पूरी तरह से हवाओं के बहाव पर निर्भर करता है। आम हवाएं जब अपनी दिशा बदल लेती हैं तब मॉनसून आता है।. जब ये ठंडे से गर्म क्षेत्रों की तरफ बहती हैं तो उनमें नमी की मात्र बढ़ जाती है जिसके कारण वर्षा होती है।

मुंबई अग्निशमन दल

मुंबई अग्निशमन दल ग्रेटर मुंबई शहर में अग्निशमन के लिए उत्तरदायी है। इनके अलावा किसी इमारत के ढहने, बाढ़ राहत, गैस रिसाव, तेल बिखराव, सड़क और रेल दुर्घटना, पशु-पक्षी बचाव, पेड़ गिरना व अन्य संबंधित प्राकृतिक आपदाओं से बचाव कार्य भी देखते हैं।

मुंबई में अग्निशमन सप्ताह का आयोजन १४ अप्रैल से २१ अप्रैल प्रतिवर्ष किया जाता है। यह १९४४ में हुए बंबई धमाकों में राहत कार्य के समय मारे गये ६६ अग्नि-शामक कार्यकर्ताओं की याद में मनाया जाता है। २६ नवंबर, २००८ को हुए आतंकवादी हमले में इनकी भूमिका भी प्रशंस्नीय रही थी। इस कार्य के लिए इन्हें वीरता पुरस्कार भी मिला था।

मूसी नदी

मूसी नदी, कृष्णा नदी की एक सहायक नदी है जो भारत के तेलंगाना राज्य बहती है। हैदराबाद नगर मूसी नदी के तट पर खड़ा है और नदी नगर को पुराने शहर और नए शहर में बांटती है। हिमायत सागर और उस्मान सागर, नदी पर बनाया गया बांध हैं, जो हैदराबाद के लिए पानी के स्रोत के रूप में कार्य करते हैं। नदी विकाराबाद के निकट अनंतगिरि पहाड़ियों से निकलती है जो हैदराबाद से ९० किलोमीटर पश्चिम मे है, नदी पूर्व की ओर बहती है और १४० किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद यह कृष्णा नदी में मिलती है।

लखनदेई नदी

लखनदेई दक्षिणी नेपाल और भारत के बिहार राज्य में बहने वाली एक नदी है। यह बागमती की एक सहायक नदी है।नेपाल में इस नदी की मुख्य धारा 'सर्लाही जिल्ला' तथा इसका स्रोत 'शिवालिक हिल्स' है। यह नदी नेपाल के बाद भारत में बिहार के सीतामढ़ी जिले में प्रवेश करती है और सीतामढ़ी शहर से होते हुये मुजफ्फरपुर जिले के कटरा में बागमती नदी में विलय हो जाती है।यह नदी बाढ़ की विभीषिका के लिए जानी जाती है।वर्तमान में इस नदी का जो भाग सीतामढ़ी नगर से होकर प्रवाहित होता है, वह नदी का पुराना एवं मृत धार हो गया है। भारत-नेपाल सीमा के 8 किलोमीटर उतर नेपाल भू-भाग से ही नदी तल सिल्टेड है, जिसके कारण नदी अपनी पूर्व की दिशा बदलते हुए अधवारा समूह की जमुरा नदी में मिल गई है।

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