किलोमीटर प्रति घंटा

किलोमीटर प्रति घंटा (अंग्रेज़ी: Kilometres per hour), गति की एक इकाई हैं, जोकि एक घंटे में की गई यात्रा किलोमीटर की संख्या व्यक्त करता हैं।

एसआई यूनिट का प्रतीक किमी/घंटा हैं। दुनिया भर में, इसका सबसे अधिक उपयोग, सड़क के संकेतों और कार चालमापी (स्पीडोमीटर) पर किया जाता हैं।[1][2]

Metric speedometer from a 1992 Euro-spec Passat B3
एक कार चालमापी जो किलोमीटर प्रति घंटे में गति दर्शाती हैं।
Ford Mondeo MK3 ST220 - Speedometer
कार चालमापी, बाहरी पैमाने पर मील प्रति घंटा (एमपीएच) और आंतरिक पैमाने पर किलोमीटर प्रति घंटा का संकेत देता है।

इतिहास

यद्यपि 1799 में मीटर शब्द को औपचारिक रूप से परिभाषित किया गया जा चुका था, पर "किलोमीटर प्रति घंटा" शब्द का तत्काल प्रयोग नहीं हो पाया। उस समय का फ्रेंच शब्द मेरियामीटर (10,000 मीटर) और मेरियामीटर प्रति घंटा, किलोमीटर और किलोमीटर को ही सन्दर्भित करता था।[3] दूसरी ओर डचों ने 1817 में किलोमीटर को अपनाया था लेकिन इसे एक स्थानीय नाम "मिजल" दिया था।[4]

रूपांतरण

  • 3.6 किमी/घंटा ≡ 1 मी/सेकंड, गति का एसआई इकाई, (मीटर प्रति सेकंड)
  • 1 किमी/घंटा ≈ 0.277 78 मी/सेकंड
  • 1 किमी/घंटा ≈ 0.621 37 मील प्रति घंटा ≈ 0.911 34 फीट प्रति सेकंड
  • 1 नॉट ≡ 1.852 किमी/घंटा
  • 1 मील प्रति घंटा ≡ 1.609344 किमी/घंटा (~ 1.61 किमी/घंटा)[5]

इन्हें भी देखें

सन्दर्भ

  1. http://www.us-metric.org/correct-si-metric-usage/
  2. http://ukma.org.uk/docs/ukma-style-guide.pdf
  3. Develey, Emmanuel (1802). Physique d'Emile: ou, Principes de la science de la nature. 1. Paris.
  4. de Gelder, Jacob (1824). Allereerste Gronden der Cijferkunst [Introduction to Numeracy] (डच में). 's-Gravenhage and Amsterdam: de Gebroeders van Cleef. पपृ॰ 155–156. अभिगमन तिथि 2 March 2011.
  5. 1 yard ≡ 0.9144 m and
    1 mile = 1760 yards thus
    1 mile = 1760 × 0.9144 ÷ 1000 km
इंद्रायणी एक्सप्रेस

२२१०५ और २२१०६ इंद्रायणी एक्सप्रेस एक सुपरफ़ास्ट एक्सप्रेस है। भारतीय रेलवे से सम्बंधित यह रेल मुंबई सी एस टी और पुणे जंक्शन के बीच में चलती है। यह रोज चलने वाली रेल है तथा इसका नाम पुणे के पास बहने वाली एक नदी इंद्रायणी के नाम पर किया गया है। यह रेल जिसका की पिछला क्रमांक १०२१ मुंबई से पुणे जाने के दौरान था तथा १०२२ पुणे से मुंबई जाने के दौरान था, इसे अब और उन्नत कर दिया गया है तथा अब यह सुपर फ़ास्ट हो गयी है। २२१०५ (मुंबई सी एस टी – पुणे जंक्शन) २२१०६ (पुणे जंक्शन से मुंबई सी एस टी)।

गतिज ऊर्जा

गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) किसी पिण्ड की वह अतिरिक्त ऊर्जा है जो उसके रेखीय वेग अथवा कोणीय वेग अथवा दोनो के कारण होती है। इसका मान उस पिण्ड को विरामावस्था से उस वेग तक त्वरित करने में किये गये कार्य के बराबर होती है। यदि किसी पिण्ड की गतिज ऊर्जा E हो तो उसे विरामावस्था में लाने के लिये E के बराबर ऋणात्मक कार्य करना पड़ेगा।गतिज ऊर्जा (रेखीय गति) = (1/2) * m * v * v ; m = द्रब्यमान, v = रेखीय वेग

गतिज ऊर्जा (घूर्णन गति) = (1/2) * I * w * w ; I = जडत्वाघूर्ण, w = कोणीय वेग

गतिज उर्जा हर जगह भिन्न होती है प्रथ्वी में अलग प्रथ्वी के बाहर अलग होती है

गेंदबाज

क्रिकेट के खेल में गेंदबाज गेंद फेंकने की जिम्मेदारी लेता है और गेंद फेंकने की इस क्रिया या कला को गेंदबाज़ी कहा जाता है।

चालमापी

चालमापी (स्पीडोमीटर) वे यंत्र हैं जों मोटरगाड़ियों में लगे रहते हैं और उनका वेग (किलोमीटर) प्रति घंटा या (मील प्रति घण्ता) में बताते हैं।

जॉगिंग

जॉगिंग दौड़ का ही एक रूप है जिसमें व्यक्ति धीमी गति से और इत्मीनान से लगातार दौड़ता रहता है। इसका मुख्य उद्देश्य शरीर की फिटनेस को बढ़ाना है। इससे शरीर पर वह तनाव उत्पन्न नहीं होता है जो तेज गति से दौड़ने के कारण पैदा होता है।

ट्रेन १८

ट्रेन १८ एक भारतीय अर्ध-हाई स्पीड ट्रेन और भारत की पहली बिना इंजन की ट्रेन है। यह पूरी तरह से भारत में डिजाइन और निर्मित होने वाली पहली ट्रेन भी है। इसे सवारी डिब्बा कारखाना, चेन्नै (आईसीएफ) द्वारा १८ महीने की अवधि में भारत सरकार के मेक इन इंडिया पहल के तहत डिजाइन और बनाया गया था। पहली रेक की यूनिट लागत को १०० करोड़ (यूएस $१४ मिलियन) के रूप में दिया गया था, हालांकि यूनिट लागत अगले उत्पादन के साथ नीचे आने की उम्मीद है। मूल कीमत पर, यह यूरोप से आयातित एक समान ट्रेन की तुलना में ४०% कम महंगा होने का अनुमान है। ट्रेन को फरवरी २०१९ में सेवा शुरू करने की योजना है, जिस तारीख से दूसरी इकाई का निर्माण और सेवा के लिए तैयार किया जाएगा।रेलवे का पहला परीक्षण रन २९ नवंबर, २०१८ को चेन्नई में हुआ, ट्रेन के ब्रेक और क्रू ओरिएंटेशन पर ध्यान केंद्रित किया, और ७ नवंबर को दिल्ली में और बाद में राजस्थान में परीक्षण किया जाएगा। दिल्ली के बाद, स्पीड परीक्षण आयोजित किया जाएगा, पहले १५० किलोमीटर प्रति घंटा (९३ मील प्रति घंटे), और उसके बाद १६० किलोमीटर प्रति घंटा (९९ मील प्रति घंटे) की ऑपरेटिंग गति पर। भारत के अनुसन्धान अभिकल्प एवं मानक संगठन द्वारा एक टीम को परीक्षण की निगरानी के लिए और अंतिम गति परीक्षण के लिए आगे संगठित किया गया। ट्रेनों का पहला सेट दिल्ली-भोपाल शताब्दी एक्स्प्रेस की जगह नई दिल्ली और भोपाल के बीच चलेगा, जो तीस साल से चल रहा है और यात्रा के समय को १५ प्रतिशत तक कम करेगा। १६० किलोमीटर प्रति घंटे (९९ मील प्रति घंटे) की ऑपरेटिंग गति पर, यह शताब्दी एक्सप्रेस को ३० किलोमीटर प्रति घंटे (१९ मील प्रति घंटे) से पीछे कर देगा।ट्रेन १८ का बाहरी ढांचा बुलेट ट्रेन की तरह है, जिसके प्रत्येक छोर की वायुगतिकीय संकीर्णता है। इसमें ट्रेन के प्रत्येक छोर पर एक ड्राइवर कोच है, जो लाइन के प्रत्येक छोर पर तेजी से बदलाव को सहज बनाता है। आंतरिक रूप से, ट्रेन में १,१२८ यात्रियों की बैठने की क्षमता के साथ १६ यात्री कारें हैं। केंद्र में दो प्रथम श्रेणी के डिब्बे हैं जिनमें ५२ यात्री प्रत्येक में बैठ सकते हैं, बाकी के कोच डिब्बों में ७८ यात्री प्रत्येक में बैठे सकते हैं। ट्रेन की सीटें, ब्रेकिंग सिस्टम, दरवाजे और ट्रांसफार्मर ट्रेन के एकमात्र तत्व हैं जिन्हें आयात किया गया है, उन्हें अगले इकाई के उत्पादन पर घरेलू रूप से बनाने की योजना है। अगले वर्ष में एक, और उसके अगले वर्ष चार और इकाइयों के उत्पादन की योजना बनाई गई है। उन इकाइयों में से दो लेआउट में स्लीपर कारों को शामिल करेंगे। भारतीय रेलवे और आईसीएफ ट्रेन २० के विकास की भी योजना बना रहे हैं, एक और अर्ध-हाई स्पीड ट्रेन जो राजधानी एक्सप्रेस की जगह लेगी। २०२० में लाइन का अनावरण किया जा सकता है।

तीव्र गति रेल

२०० किलोमीटर प्रति घंटा (१२५ मील प्रति घंटा) से तेज़ चलने वाली पब्लिक यातायात रेल को तीव्र गति रेल माना जाता है। अंतर्राष्ट्रीय रेल संघ के मुताबिक तीव्र गति रेल वह रेल है जो अपने लिये ही निर्धारित रेल पथ पर २५० किलोमीटर प्रति घंटा से तेज़ चलती है और अपग्रेडेड सामान्य रेल पथ पर २०० किलोमीटर प्रति घंटा से तेज़ चलती है।वर्तमान में दुनिया भर में लगभग ३५०० किलोमीटर लंबा तेज गति से चलने वाली रेल के लिये लौहपथ तैयार है जिसमें से १५४० किलोमीटर तो केवल फ़्रांस में ही है। यह यूरोप के तीन चौथाई तीव्र गति रेललाइन के बराबर है।

सामान्यत: तीव्र गति रेल अधिकतम २५० किलोमीटर प्रति घंटा एवं ३०० किलोमीटर प्रति घंटा के बीच चलती हैं।

दुनिया की सबसे तेज़ रेल लाइन पर चलने वाली का रिकार्ड फ्रान्स की टी जी वी के नाम है जिसने ३ अप्रैल २००७ को ५७४.८ किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चला कर बनाया।

वर्तमान में किसी भी प्रकार की दुनिया की सबसे तेज़ चलने वाली रेल का रिकार्ड ५८१ किलोमीटर प्रति घंटा का है जो जापान की जे आर – मैगलेव MLX01 (चुम्बकीय रेल) ने बनाया है।

तेज गेंदबाज़ी

तेज गेंदबाज़ी को पेस बॉलिंग के नाम से भी जाना जाता है जो क्रिकेट के खेल में गेंदबाज़ी के दो प्रमुख प्रकारों में से एक है। दूसरा प्रकार है स्पिन बॉलिंग.

तेज़ गेंदबाज़ी करने वाले खिलाडियों को अक्सर तेज़ गेंदबाज़ (फास्ट बॉलर), फास्टमेन, पेस बॉलर, या पेसमेन कहा जाता है, हालांकि कभी कभी तेज़ गेंदबाज़ी की विशेष तकनीक का प्रयोग करने वाले गेंदबाज़ को स्विंग बॉलर या सीम बॉलर भी कहा जाता है।

तेज़ गेंदबाज़ी का मुख्य उद्देश्य होता है क्रिकेट की सख्त गेंद को तेज़ गति के साथ डालना और इसे इतना वेग देना कि यह उछाल के साथ पिच पर बाउंस हो सके या हवा में होती हुई साइड से निकल जाये, ताकि बल्लेबाज़ के लिए गेंद को सफाई से हिट करना मुश्किल हो जाये.

एक प्रारूपिक तेज़ गति से डाली गयी गेंद की गति 136 से 150 किलोमीटर/घंटा (85 से 95 मीटर प्रति घंटा) होती है। अब तक डाली सबसे तेज़ गेंद का अनाधिकारिक रिकॉर्ड 101.9 मील/घंटा (164.0 किमी/घंटा) में पकिस्तान के मोहम्मद सामी के नाम पर दर्ज किया गया है, यह गेंद भारत के खिलाफ एक मैच में डाली गयी थी।अधिकारिक रूप से दर्ज की गयी सबसे तेज़ गति से डाली गयी गेंद की गति 161.3 किलोमीटर प्रति घंटा (100.2 मीटर प्रति घंटा) थी और यह गेंद 2003 के क्रिकेट विश्व कप में इंग्लैण्ड के खिलाफ एक मैच के दौरान पकिस्तान के शोएब अख्तर के द्वारा डाली गयी थी। इस गेंद पर खेलने वाला बल्लेबाज़ निक नाईट था, जिसने लेग साइड पर हिट किया। हालांकि बाद में ब्रेट ली की एक गेंद की गति भी इतनी ही पायी गयी, परन्तु रडार के संकेतों में बाहरी हस्तक्षेप के कारण इसे ठीक तरीके से दर्ज नहीं किया जा सका था। दो बैक अप राडारों ने इस डिलीवरी के लिए 142 किमी/घंटा (88 मील/घंटा) की सही गति को दर्ज किया।अधिकांश क्रिकेट देशों में, तेज़ गेंदबाज़ों को टीम की गेंदबाज़ी का मुख्य आधार माना जाता है, जबकि धीमे गेंदबाज़ सहायक भूमिका निभाते हैं।

उपमहाद्वीप में, विशेष रूप से भारत और श्रीलंका में, अक्सर इसका विपरीत सत्य है, जहां तेज़ गेंदबाज़ स्पिनर के लिए सही भूमिका निभाते हैं।

ऐसा काफी हद तक इन देशों में प्रयुक्त पिच की स्थिति के कारण होता है, जो तेज़ गेंदबाज़ की तुलना में स्पिनर के लिए अधिक सहायक होती है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्पिनर के विशिष्ट कौशल की तुलना पेस बॉलर (तेज़ गेंदबाज़) से की जाती है।

इसके विपरीत, अन्य मुख्य उपमहाद्वीप देश, पकिस्तान, में कई कुशल तेज़ गेंदबाज़ हुए हैं, क्योंकि इस देश को रिवर्स स्विंग में महारत हासिल है और यहां की पिचें तेज़ गेंदबाज़ों के लिए अधिक सहायक हैं।

नॉट (इकाई)

नॉट गति की इकाई है। यह एक नॉटिकल मील प्रति घंटा के बराबर होती है।

पवन-वेग-मापी

Dr Manoj kumawat machiwal kajipura wale ke anushar paribhasa:-जिस उपकरण से पृथ्वीतल पर के पवन का वेग नापा जाता है, उसे पवन-वेग-मापी (Anemometer) कहते हैं। भिन्न-भिन्न प्रकार के पवन-वेग-मापियों से पवन के बल एवं वेग के मापन को पवन-वेग-मापन (Anemometry) कहते हैं। मौसमविज्ञान के अध्ययन में पवन का वेगमापन महत्व का स्थान रखता है।

मर्सिडीज बेंज डब्ल्यू 212

मर्सिडीज बेंज W212 पूर्व W211 मॉडल की जगह बेची गई नौवीं पीढ़ी की ई-क्लास कार है। CLK-क्लास कूप और कैब्रीओलेट का एक प्रतिस्थापन, C207 संबंधित ई-क्लास कूप का चेसिस कोड है। नई ई क्लास की बिक्री यूरोप में मार्च में और अमेरिका में जुलाई 2009 में शुरू की गई।

मैग्लेव ट्रेन

मैग्लेव, या चुंबकीय प्रोत्थापन या आकाशगामिता, एक परिवहन प्रणाली है जो उत्तोलन एवं प्रणोदन के लिए बहुत बड़े पैमाने पर चुम्बकों की चुम्बकीय उत्तोलन शक्ति का इस्तेमाल करके वाहनों, मुख्य रूप से ट्रेनों, को बिना जमीन छुए नियंत्रित और आगे बढ़ाने का काम करती है। इस विधि में पहिया युक्त सामूहिक पारगमन प्रणालियों की अपेक्षा अधिक तेज, शांत और चिकनी होने की क्षमता है। आम तौर पर उत्तोलन के लिए आवश्यक शक्ति का प्रतिशत खास तौर पर समग्र खपत के प्रतिशत से अधिक नहीं होता है; अन्य किसी भी द्रुत गति वाले ट्रेन की तरह घर्षण पर नियंत्रण प्राप्त करने के लिए इस प्रयुक्त शक्ति में से अधिकांश शक्ति की जरूरत पड़ती है।

अभी तक मैग्लेव ट्रेन की उच्चतम गति 581 किलोमीटर प्रति घंटा (361 मील/घंटा) दर्ज की गई है। इस कीर्तिमान को वर्ष 2003 में जापान में स्थापित किया गया था, जो पारंपरिक टीजीवी (TGV) की दर्ज की गई गति से 6 किलोमीटर प्रति घंटा (3.7 मील/घंटा) अधिक तेज थी।

प्रथम वाणिज्यिक मैग्लेव "लोक-परिवाहक" को आधिकारिक तौर पर वर्ष 1984 में इंग्लैण्ड के बर्मिंघम में चालू किया गया था। इसे बर्मिंघम अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा और बर्मिघम अंतरराष्ट्रीय रेलवे स्टेशन के बीच, 42 किमी/घंटा (26 मील/घंटा) की गति से, मोनोरेल ट्रैक के एक उन्नत 600-मीटर (2,000 फीट) सेक्शन पर चलाया गया था। विश्वसनीयता और डिज़ाइन समस्याओं की वजह से इस प्रणाली को अंत में वर्ष 1995 में बंद कर दिया गया।

शायद वर्तमान में वाणिज्यिक तौर पर संचालित होने वाली द्रुत-गति मैग्लेव प्रौद्योगिकी का सबसे जाना माना कार्यान्वयन चीन के शंघाई में चलने वाले जर्मन-निर्मित ट्रांसरैपिड ट्रेन की आईओएस (IOS अर्थात् इनिशियल ऑपरेटिंग सेगमेंट या आरंभिक प्रचालन खंड) प्रदर्शन लाइन है जो अधिकतम 431 किमी/घंटा (268 मील/घंटा) और औसतन 250 किमी/घंटा (160 मील/घंटा) की गति से केवल 7 मिनट 20 सेकण्ड में लोगों को एयरपोर्ट तक 30 किमी (18.6 मील) का सफ़र तय कराता है।

यमुना एक्सप्रेसवे

यमुना द्रुतगामी मार्ग एक द्रुतगामी मार्ग है जो १६५ किलोमीटर लम्बा है। वैसे तो यमुना द्रुतगामी मार्ग को बनाने का ऐलान साल 2001 में किया गया था। लेकिन सरकार बदली और बदलने के साथ ही साल 2003 में इस पर काम बंद हो गया। साल 2007 में इसे दोबारा शुरू किया गया। लेकिन अब यमुना द्रुतगामी मार्ग इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी ने इस हाइवे को हरी झंडी दे दी है। दिल्ली आगरा मार्ग पर बढ़ रहे परिवहन दबाव को इस द्रुतगामी मार्ग से कम किया गया है। साथ ही इस द्रुतगामी मार्ग को नए इंटरनेशनल एयरपोर्ट यानी ताज एविएशन हब से भी जोड़ा गया है।

राजधानी एक्स्प्रेस

राजधानी एक्सप्रेस भारतीय रेल की एक पैसेंजर रेल सेवा है जो भारत की राजधानी दिल्ली को देश के विभिन्न राज्यों की राजधानी को जोड़ता है।

शिव गंगा एक्सप्रेस

शिव गंगा एक्सप्रेस उत्तर पूर्व रेलवे जोन वाराणसी की एक भारतीय सुपर फास्ट ट्रेन है इसका नाम वाराणसी के दो अनमोल रत्नों: भगवान शिव और नदी गंगा के नाम पर रखा गया है। मार्ग में मुख्य शहर इलाहाबाद और कानपुर है। इसे 2002 के रेल बजट में पारित कर दिया गया और अतः इसने 1 जुलाई 2002 से अपनी यात्रा की शुरुआत की तथा यह प्रति दिन चलती है और वाराणसी (2014 से मंडुआडीह) से नई दिल्ली 755 किलोमीटर (469 मील) की दूरी तय करती है।

साबरमती एक्स्प्रेस ९१६६

यह भारतीय रेल द्वारा चलायी जाने वाली दरभंगा से अहमदाबाद तक जाने वाली सवारी गाड़ी है। 1944 किलोमीटर के सफर में यह कूल 67 स्थानों पर रुकती है।। इसकी औसत गति 46 किलोमीटर प्रति घंटा है।

km 1944 मी यह दरभंगा जंक्सन से सुबह 4.35 बजे प्लेटफॉर्म संख्या 1 से खुलती है। यह रेलगाड़ी दरभंगा से सोम, बुध, शनि को खुलती है। यह अगली रात 4.15 बजे अहमदाबाद पहुंचती है। इसमें दो एसएलआर, 2AC 1, 13SL = 16 कोच हैं।

सितारा विमान

सितारा (HAL HJT-36 Sitara) भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा विकसित एक सबसोनिक इंटरमीडिएट जेट ट्रेनर विमान है। सितारा विमान एचएएल किरण सितारा विमान को स्टेज-2 ट्रेनर के रूप में बदल देगा।

सीतारा एक पारंपरिक जेट ट्रेनर है जिसमे कम धुंध पंखों, अग्रानुक्रम कॉकपिट और अपने हवाई जहाज़ के दोनों तरफ इंजन के लिए छोटा हवा प्रवेश है।

सिद्धार्थ कौल

सिद्धार्थ कौल (जन्म १९ मई १९९०) एक भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी है जो मुख्य रूप से एक मध्यम गति के तेज गेंदबाज जो लगभग १३० किलोमीटर प्रति घंटा की गति से गेंदबाजी करते है, उन्होंने २००७ में पंजाब के लिए अपने प्रथम श्रेणी क्रिकेट की शुरुआत की थी। कौल ने २००८ अंडर-१९ क्रिकेट विश्व कप में भारतीय अंडर-१९ क्रिकेट टीम का हिस्सा थे और उन्हें बाद में उन्हें इंडियन प्रीमियर लीग के लिए योग्य माना गया और आईपीएल के पहले ही सीजन में है कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए हस्ताक्षर कर दिए थे। उनके पिता तेज कौल ने १९७० के दशक में जम्मू और कश्मीर के तीन सत्रों में खेले थे। २०१६ इंडियन प्रीमियर लीग की नीलामी में इन्हें सनराइजर्स हैदराबाद ने खरीदा था।

६७पी/चुरयुमोव-गेरासिमेंको

६७पी/चुरयुमोव​-गेरासिमेंको बृहस्पति-परिवार का एक धूमकेतु है। ये मूल रूप से काइपर घेरे से है। इसकी कक्षीय अवधि 6.45 वर्ष, घूर्णन काल लगभग 12.4 घंटे और अधिकतम गति 135,000 किलोमीटर प्रति घंटा (38 किलोमीटर प्रति सेकंड) है। ये यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के रोसेटा मिशन का गंतव्य था।

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