कटक (भूविज्ञान)

कटक (ridge) ऐसी भूवैज्ञानिक स्थलाकृती होती है जिसमें धरती, बर्फ़ या किसी अन्य स्थाकृतिक सामग्री का एक उभरा हुआ और तंग अंश कुछ दूरी तक लगातार चले। उदाहरण के लिये पर्वतमालाओं के अक्सर पर्वतों के शिखरों पर लम्बी दूरी तक कटक की आकृति मिलती है, जो समभ्व है कि शिखरों के बीच ज़रा कम ऊँचाई की हो, लेकिन आसपास की धरती से स्पष्ट ऊँची प्रतीत होती है।[1]

Tsubakurodake from Otenshodake 2002-8-22
जापान में एक पर्वतीय कटक

इन्हें भी देखें

सन्दर्भ

  1. "Interior Structure of the Earth and Planets," Vladimir Naumovich Zharkov, CRC Press, 1986, ISBN 978-3-71860-067-0
उत्तर कोल

उत्तर कोल (North Col) हिमालय में एवरेस्ट पर्वत को पास ही स्थित चंग्त्से पर्वत से जोड़ने वाली पर्वतीय कटक (रिज) में हिमानियों द्वारा काटकर बन गए एक तंग पहाड़ी दर्रे का नाम है। भूविज्ञान में इस प्रकार के दर्रे को कोल कहा जाता है। अधिकतर पर्वतारोही एवरेस्ट को दक्षिण तरफ़ (यानि नेपाल) से चढ़ने का प्रयास करते हैं। वे पर्वतारोही जो इसके विपरीत उत्तर दिशा (यानि तिब्बत) से चढ़ते हैं, वे एवरेस्ट की ढलानों पर पहुंचकर अपना चढ़ाई का पहला खेमा इसी उत्तर कोल पर ही लगाते हैं।

कोल (भूविज्ञान)

भूविज्ञान में कोल (Col) दो पर्वतों के बीच में उपस्थित कटक (ridge) का सबसे निचला स्थान होता है। यदि दो पर्वतों के बीच में से निकलना हो तो कोल ही सबसे निम्न स्थान होता है। बड़े कोल को अक्सर पहाड़ी दर्रा (mountain pass) कहा जाता है। विश्व में कई कोल प्रसिद्ध हैं, मसलन हिमालय में उत्तर कोल (North Col) एवरेस्ट पर्वत और चंग्त्से पर्वत के बीच में स्थित कटक के ऊपर से निकलने का एक तीखी दीवारों वाली दरार है जिसे हिमानियों ने लाखों वर्षों में बह-बह कर काटकर बनाया है।

तीक्ष्ण कटक

पर्वतीय भागों में पाहाडी के दोनो ओर के सर्क एक दूसरे की तरफ सरकते हैं तो उनके मध्य का भाग अपरदित होकर नुकीला होने लगता हैं। अत्यधिक अपरदित होने के कारण नुकीली चोटी का विकास होता हैं और यह कंघी के दांतों के समान दिखाई पडती हैं। इसी भाग को ही तीक्ष्ण कटक या अरेत कहते हैं।

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