इब्रानी भाषा

इब्रानी (עִבְרִית, इव्रित, इव्ख़्रित) सामी-हामी भाषा-परिवार की सामी शाखा में आने वाली एक भाषा है। ये इस्राइल की मुख्य और राष्ट्रभाषा है। इसका पुरातन रूप तौराती इब्रानी यहूदी धर्म की धर्मभाषा है और तौरात, बाइबिल का पुराना नियम, इसी में लिखा गया था। ये इब्रानी लिपि में लिखी जाती है ये दायें से बायें पढ़ी और लिखी जाती है। पश्चिम के विश्वविद्यालयों में आजकल इब्रानी का अध्ययन अपेक्षाकृत लोकप्रिय है।

प्रथम महायुद्ध के बाद फिलिस्तीन (यहूदियों का इज़रायल नामक नया राज्य) की राजभाषा आधुनिक इब्रानी है। सन् १९२५ई. में जेरूसलम का इब्रानी विश्वविद्यालय स्थापित हुआ जिसके सभी विभागों में इब्रानी ही शिक्षा का माध्यम है। इज़रायल राज्य में कई दैनिक पत्र भी इब्रानी में निकलते हैं।

इब्रानी को अंतरराष्ट्रीय स्तर के भाषा वैज्ञानिकों ने भाषाओं की मृत सूची में डाल दिया था। 1948 में जब इस्राइल स्वतंत्र हुआ तो उसने तुर्की की तरह ही अपनी भाषा इब्रानी में शिक्षा और शासन-प्रशासन से जुड़ी गतिविधियों को कार्यान्वित करने का निर्णय लिया। आज यहां सभी शैक्षिक, प्रशासनिक, वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों के लक्ष्य इब्रानी में गरिमा के साथ प्राप्त कर लिए हैं। यहां विज्ञान और तकनीक से जुड़े श्रेष्ठतम आविष्कारों की शब्दावली इब्रानी में है।

भाषा का नाम
बोली जाती है
क्षेत्र
कुल बोलने वाले
भाषा परिवार
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भाषा कूट
ISO 639-1 None
ISO 639-2
ISO 639-3
Idioma hebreo
इब्रानीभाषी क्षेत्र

परिचय

इब्रानी भाषा सामी परिवार ((सेमेटिक फेमिली) की भाषाओं में से एक है। यह यहूददियों की प्राचीन सांस्कृतिक भाषा है। इसी में उनका धर्मग्रंथ (बाइबिल का पूर्वार्ध) लिखा हुआ है; अत: इब्रानी का ज्ञान मुख्यतया बाइबिल पर निर्भर है।

व्युत्पत्ति की दृष्टि से 'सामी' शब्द नौह के पुत्र सेम से संबंध रखता है। सामी भाषाओं की पूर्वी उपशाखा का क्षेत्र मेसोपोटेमिया था। वहाँ पहले सुमेरियन भाषा बोली जाती थी; फलस्वरूप सुमेर की भाषा ने पूर्वी सामी भाषाओं को बहुत कुछ प्रभावित किया है। प्राचीनतम सामी भाषा अक्कादीय की दो उपशाखाएँ हैं, अर्थात् असूरी और बाबुली। सामी परिवार की दक्षिणी उपशाखा में अरबी, हब्शी (इथोपियाई) तथा साबा की भाषाएँ प्रधान हैं। सामी वर्ग की पश्चिमी उपशाखा की मुख्य भाषाएँ इस प्रकार हैं: उगारितीय, कनानीय, आरमीय और इब्रानी। इनमें से उगारितीय भाषा (१५०० ई. पू.) सबसे प्राचीन है; इसका तथा कनानीय भाषा का गहरा संबंध है।

जब यहूदी लोग पहले पहल कनान देश में आकर बसने लगे तब वे कनानीय से मिलती जुलती एक आरमीय उपभाषा बोलते थे; उससे उनकी अपनी इब्रानी भाषा का विकास हुआ है। ऐसा प्रतीत होता है कि 'इब्रानी' शब्द हपिरू से निकला है; हपिरू (शब्दार्थ 'विदेशी') उत्तरी अरबी मरुभूमि की एक यायावर जाति थी, जिसके साथ यहूदियों का संबंध माना जाता था। बाबीलोन के निर्वासन के बाद (५३९ ई. पू.) यहूदी लोग दैनिक जीवन में इब्रानी छोड़कर आरमीय भाषा बोलने लगे। इस भाषा की कई बोलियाँ प्रचलित थीं। ईसा भी आरमीय भाषा बोलते थे, किंतु इस मूल भाषा के बहुत कम शब्द सुरक्षित रह सके।

अन्य सामी भाषाओं की तरह इब्रानी की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं। धातुएँ प्राय: त्रिव्यंजनात्मक होती हैं। धातुओं में स्वर होते ही नहीं और साधारण शब्दों के स्वर भी प्राय: नहीं लिखे जाते। प्रत्यय और उपसर्ग द्वारा पुरुष तथा वचन का बोध कराया जाता है। क्रियाओं के रूपांतर अपेक्षाकृत कम हैं। साधारण अर्थ में काल नहीं होते, केवल वाच्य होते हैं। वाक्यविन्यास अत्यंत सरल है, वाक्यांश प्राय: 'और' शब्द से सहारे जोड़े जाते हैं। इब्रानी में अर्थ के सूक्ष्म भेद व्यक्त करना दु:साध्य है। वास्तव में इब्रानी भाषा दार्शनिक विवेचना की अपेक्षा कथासाहित्य तथा काव्य के लिए कहीं अधिक उपर्युक्त है।

प्रथम शताब्दी ई. में यहूदी शास्त्रियों ने इब्रानी भाषा को लिपिबद्ध करने की एक नई प्रणाली चलाई जिसके द्वारा बोलचाल में शताब्दियों से अप्रयुक्त इब्रानी भाषा का स्वरूप तथा उसका उच्चारण भी निश्चित किया गया। आठवीं-दसवीं सदी में उन्होंने समस्त इब्रानी बाइबिल का इसी प्रणाली के अनुसार संपादन किया है। यह मसोरा का परंपरागत पाठ बतलाया जाता है और पिछली दस शताब्दियों से इब्रानी बाइबिल का यह सबसे प्रचलित पाठ है। इसका सर्वाधिक प्रसिद्ध संस्करण बेन ह्यीम का है जो १५२४ ई. में वेनिस में प्रकाशित हुआ था। सन् १९४७ ई. में फिलिस्तीन के कुमराम नामक स्थान पर इब्रानी बाइबिल तथा अन्य साहित्य की अत्यंत प्राचीन हस्तलिपियाँ मिल गईं। इनका लिपिकाल प्राय: दूसरी शताब्दी ई.पू. माना जाता है। विद्वानों को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि बाइबिल की ये प्राचीन पोथियाँ मसोरा के पाठ से अधिक भिन्न नहीं हैं।

मध्यकाल में एक विशेष इब्रानी बोली की उत्पत्ति हुई थी जिसे जर्मनी के वे यहूदी बोलते थे जो पोलैंड और रूस में जाकर बस गए थे। इस बोली को 'यहूदी जर्मन' अथवा 'यिद्दिश' कहकर पुकारा जाता है। वास्तव में यह एक जर्मन बोली है जो इब्रानी लिपि में लिखी जाती है ओर जिसमें बहुत से आरमीय, पोलिश तथा रूसी शब्द भी सम्मिलित हैं। इसका व्याकरण अस्थिर है, किंतु इसका साहित्य समृद्ध है।

लिपि

इब्रानी भाषा, इब्रानी लिपि में लिखी जाती है जो दाएँ से बाएँ लिखी-पढ़ी जाती है।

तस्वीरें

Alphabet Hebrew

दाउद के तारे के संदर्भ से समझाया गया इब्रानी वर्णमाला

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इस्राइल में सड़क के संकेत - इब्रानी, अरबी और अंग्रेज़ी पाठ के साथ

इन्हें भी देखें

बाहरी कड़ियाँ

अब्राहम इब्न एजरा

अब्राहम इब्न एजरा हिब्रू : אברהם אבן עזרא or ראב"ע, अरबी : अबेनेज्रा ; 1089 – 1164) अपने समय का प्रसिद्ध यहूदी कवि और विद्वान् था।

उसका पूरा नाम अब्राहम बिनमेअर इब्न एजरा था। वह तोलेदो (स्पेन) में पैदा हुआ था। अपनी जन्मभूमि में यथेष्ट कीर्ति उपार्जित कर सन् ११४० में वह भ्रमण के लिए निकला। सबसे पहले वह उत्तरी अफ्रीका के देशों में गया। कुछ वर्षों तक वहाँ ठहरने के पश्चात् वह इटली, फ्रांस और इंग्लैड भी गया। लगभग २५ वर्ष तक विदेशों में रहकर उसने अपनी विद्वता की कीर्तिध्वजाएँ फहराई। वह उच्च कोटि का विचारक ओर जनप्रिय कवि था। आधुनिक इब्रानी व्याकरण के जनक हय्यूज की पुस्तकों का उसने अरबी से इब्रानी भाषा में अनुवाद किया और स्वयं उनपर टीकाएँ लिखीं। अबेनेज्रा की रचनाओं में दर्शन, गाणित, ज्योतिष आदि विषयों के ग्रंथ हैं। किंतु उसकी प्रसिद्धि का मुख्य कारण यहूदी धर्मग्रंथों पर लिखी उसकी टीकाएँ हैं। पुराने अहदनामें के प्रमुख यहूदी पैगंबरी की पुस्तकों पर अबेनेज्रा के भाष्य बड़े चाव से पढ़े जाते हैं।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

अरबी भाषा

अरबी भाषा सामी भाषा परिवार की एक भाषा है। ये हिन्द यूरोपीय परिवार की भाषाओं से मुख़्तलिफ़ है, यहाँ तक कि फ़ारसी से भी। ये इब्रानी भाषा से सम्बन्धित है। अरबी इस्लाम धर्म की धर्मभाषा है, जिसमें क़ुरान-ए-शरीफ़ लिखी गयी है।

अल्लाह

अल्लाह (अरबी: اللہ ، अल्लाह्) अरबी भाषा में ईश्वर के लिये शब्द है। इसे मुख्यतः मुसलमानों और अरब ईसायों द्वारा भगवान का उल्लेख करने के लिये प्रयोग में लिया जाता है।

इब्रानी लिपि

इब्रानी लिपि (इब्रानी भाषा : אָלֶף־בֵּית עִבְרִי[a], alefbet ʿIvri) का प्रयोग इब्रानी भाषा सहित अन्य यहूदी भाषाओं को लिखने में होता है। इसे यहूदी लिपि, वर्गाकार लिपि, ब्लॉक लिपि, या ऐतिहासिक रूप से अरिमियाई लिपि (Aramaic alphabet) कहते हैं। यिद्दिश भाषा, लैडिनो (Ladino) तथा यहूदी-अरबी (Judeo-Arabic) यहूदी भाषाएँ इसी में लिखी जाती हैं। इब्रानी लिपि दाएँ से बाएँ की तरफ लिखी और पढ़ी जाती है।

इब्रानी लिपि के दो रूप प्रयोग किए जाते रहे हैं- मूल इब्रानी लिपि तथा आधुनिक इब्रानी लिपि जो वर्गाकार दिखती है।

Note: The chart reads from left to right.

इब्रानी साहित्य

इब्रानी साहित्य (Hebrew literature) के अन्तर्गत इब्रानी भाषा में लिखित प्राचीन, मध्यकालीन तथा आधुनिक साहित्य आता है। यह मुख्यतः यहूदी धर्मावलम्बियों द्वारा सृजित साहित्य है किन्तु कुछ मात्रा में गैर-यहूदियों ने भी इसमें योगदान किया है। हिब्रू साहित्य की रचना संसार के विभिन्न भागों में हुई किन्तु आधुनिक हिब्रू साहित्य मुख्यतः इजराइल में सृजित होता है।

गब्रीएल

गब्रीएल या जिब्राइल बाइबिल में उल्लिखित देवदूतों में से एक है। इब्रानी भाषा में इस नाम का अर्थ है - 'ईश्वर का सामर्थ्य'। बाइबिल के पूर्वार्ध में वे दानियाल नामक नबी के लिये मसीह के राज्य संबंधी भविष्यद्वारिणों की व्याख्या करते हें। उत्तरार्ध में वे मसीह के अग्रदूत योहन बपतिसमा का तथा बाद में ईसाहमसीह का आगामी जन्म घोषित करते हैं। ईसाई गब्रीएल की उपासना रक्षक के रूप में करते हैं।

इस्लाम में माना जाता है कि हजरत मुहम्मद ने गब्रीएल से अपना धर्म ग्रहण किया था। मुस्लिम समुदाय की मान्यता के अनुसार जिब्रील, अल्लाह के द्वारा सृष्टि किया गया एक मलक या फ़रिश्ता है. इस मलक का काम यह था कि अल्लाह के आदेनुसार नबी के पास अल्लाह का आदेश या दिव्या वाणी लेकर जाता है। पैगम्बर मुहम्मद अपने जीवनकाल में एक गुफा में जाया करते थे, जहां पर जिब्रील ने प्रकट होकर उन्हें अल्लाह की बातों को लोगों तक पहुंचाने का काम सौंपा था।

तनख़

यहूदियों की धर्मभाषा 'इब्रानी' (हिब्रू) और यहूदी धर्मग्रंथ का नाम 'तनख' है, जो इब्रानी भाषा में लिखा गया है। इसे 'तौरेव' 'तालमुद' या 'तोरा' भी कहते हैं। असल में ईसाइयों की बाइबिल में इस धर्मग्रंथ को शामिल करके इसे 'पुराना अहदनामा' अर्थात ओल्ड टेस्टामेंट कहते हैं। तनख का रचनाकाल ई.पू. 444 से लेकर ई.पू. 100 के बीच का माना जाता है।

तेल (पुरातत्वशास्त्र)

तेल या तॆल (अंग्रेज़ी: tell या tel अरबी:تَل‎‎ से) पुरातत्वशास्त्र में ऐसे टीले को कहते हैं जो किसी स्थान पर कई सदियों से मानवों के बसने और फिर छोड़ देने से बन गया हो। जब लोगों की कई पुश्तें एक ही जगह पर रहें और बार-बार वहाँ निर्माण और पुनर्निर्माण करती जाएँ तो सैंकड़ों सालों में उस जगह पर एक पहाड़ी जैसा टीला बन जाता है। इस टीले का अधिकाँश भाग मिटटी की बनी ईंटें होता है जो जल्दी ही टूटकर वापस मिटटी बन जाती हैं। अक्सर किसी टेल में ऊपर एक समतल भाग और उसके इर्द-गिर्द ढलानें होती हैं।

ध्रुवमत्स्य तारामंडल

ध्रुवमत्स्य या अरसा माइनर एक तारामंडल है जो अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ द्वारा जारी की गई ८८ तारामंडलों की सूची में शामिल है। दूसरी शताब्दी ईसवी में टॉलमी ने जिन ४८ तारामंडलों की सूची बनाई थी यह उनमें भी शामिल था। ध्रुवमत्स्य तारामंडल खगोलीय गोले के उत्तरी भाग में स्थित है। ध्रुव तारा भी आकाश में इसी तारामंडल के क्षेत्र में नज़र आती है।

पठान

पश्तून, पख़्तून (पश्तो: پښتانه‎, पश्ताना) या पठान (उर्दू:پٹھان‎) दक्षिण एशिया में बसने वाली एक लोक-जाति है। वे मुख्य रूप में अफ़्ग़ानिस्तान में हिन्दु कुश पर्वतों और पाकिस्तान में सिन्धु नदी के दरमियानी क्षेत्र में रहते हैं हालांकि पश्तून समुदाय अफ़्ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के अन्य क्षेत्रों में भी रहते हैं। पश्तूनों की पहचान में पश्तो भाषा, पश्तूनवाली मर्यादा का पालन और किसी ज्ञात पश्तून क़बीले की सदस्यता शामिल हैं।पठान जाति की जड़े कहाँ थी इस बात का इतिहासकारों को ज्ञान नहीं लेकिन संस्कृत और यूनानी स्रोतों के अनुसार उनके वर्तमान इलाक़ों में कभी पक्ता नामक जाति रहा करती थी जो संभवतः पठानों के पूर्वज रहें हों। सन् १९७९ के बाद अफ़्ग़ानिस्तान में असुरक्षा के कारण जनगणना नहीं हो पाई है लेकिन ऍथनोलॉग के अनुसार पश्तून की जनसँख्या ५ करोड़ के आसपास अनुमानित की गई है। पश्तून क़बीलों और ख़ानदानों का भी शुमार करने की कोशिश की गई है और अनुमान लगाया जाता है कि विश्व में लगभग ३५० से ४०० पठान क़बीले और उपक़बीले हैं। पश्तून जाति अफ़्ग़ानिस्तान का सबसे बड़ा समुदाय है।

फ़ोनीशियाई भाषा

फ़ोनीशियाई एक प्राचीन सामी भाषा जो की लगभग विलुप्त हो चुकी है। इस की निकटतम संबंधी इब्रानी भाषा है। प्राचीनकाल में यह भाषा फ़ोनीशिया के लोग बोला करते थे। इसे लिखने के लिए फ़ोनीशियाई वर्णमाला का प्रयोग किया जाता था।

मायावती तारा

मायावती या अलग़ोल, जिसका बायर नाम बेटा परसई (β Persei या β Per) है, ययाति तारामंडल का दूसरा सब से रोशन तारा है। यह पृथ्वी से दिखने वाले तारों में से ५९वाँ सब से रोशन तारा भी है। यह एक ऐसा द्वितारा है जिसके मुख्य तारे के इर्द-गिर्द घूमता साथी तारा कभी तो उसके और पृथ्वी के बीच आ जाता है और कभी नहीं। इस से यह पृथ्वी से एक परिवर्ती तारा लगता है जिसकी चमक बदलती रहती है। वैदिक काल में इसकी मायावी बदलती प्रकृति के कारण ही इसका नाम "मायावती" पड़ा। इसे पश्चिम और अरब संस्कृतियों में एक दुर्भाग्य का तारा माना जाता था। यह पृथ्वी से लगभग ९३ प्रकाश वर्ष की दूरी पर है। पृथ्वी से देखी गई इसकी चमक (सापेक्ष कान्तिमान) वैसे तो +२.१० मैग्नीट्यूड पर रहती है लेकिन हर २ दिन २० घंटे और ४९ मिनटों के बाद इसकी चमक गिरकर +३.४ हो जाती है (याद रखें कि मैग्नीट्यूड एक ऐसा उल्टा माप है कि यह जितना कम हो रोशनी उतनी अधिक होती है)।

यहूदी धर्म

यहूदी धर्म इस्राइल और हिब्रू भाषियों का राजधर्म है और इसका पवित्र ग्रंथ तनख़ बाईबल का प्राचीन भाग माना जाता है।ईसाई धर्म का आधार इसी परम्परा और विचारधारा को माना जाता है। इस धर्म में एकेश्वरवाद और ईश्वर के दूत यानि पैग़म्बर की मान्यता प्रधान है। अपने लिखित इतिहास की वजह से ये कम से कम ३००० साल पुराना माना जाता है। यहूदी धर्म को माननेवाले विश्व में करीब १.४३ करोड़ है, जो विश्व की जनसंख्या में ०.2% है।

यहोवा

यहोवा (en:Yahweh) यहूदी धर्म में और इब्रानी भाषा में परमेश्वर का नाम है। यहूदी मानते हैं कि सबसे पहले ये नाम परमेश्वर ने मूसा को सुनाया था। ये शब्द ईसाईयों और यहूदियों के धर्मग्रन्थ बाइबिल के पुराने नियम में कई बार आता है।

श्वा

भाषाविज्ञान और स्वानिकी में श्वा (अंग्रेजी: schwa) मध्य-केंद्रीय स्वर वर्ण को कहते हैं। इस वर्ण को देवनागरी में 'अ' लिखा जाता है और अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला में इसे 'ə' के चिन्ह से दर्शाया जाता है।

सलोम्

सलोम् सम्पादन Şalom (इब्रानी भाषा: "שלום", हिन्दी: "शांति") का यहूदी तुर्की साप्ताहिक समाचार पत्र में प्रकाशित है। उसका नाम हिब्रू शब्द के तुर्की वर्तनी एसएचएलओएम है। इसे २९ अक्टूबर १९४७ को तुर्की यहूदी पत्रकार आव्रम ळेयोन् द्वारा स्थापित किया गया था। यह इस्तांबुल में छपा है। के अलावा एक यहूदी स्पेनी पृष्ठ से, यह तुर्की में प्रकाशित है। ञकुप बरोकस् उसके संपादक है। इसका प्रचलन के बारे में ५,००० है।

सामी शब्द जड़

सामी शब्द जड़ (Semitic word root) अरबी, इब्रानी और सीरियाई जैसी सामी भाषाओं के क्रिया और संज्ञा शब्दों में व्यंजनों की उस छोटी शृंखला को कहते हैं जो किसी मूल अवधारणा (कॅान्सेप्ट) या चीज़ को दर्शाते हैं। इन जड़-व्यंजनों के इर्द-गिर्द स्वर वर्णों (या कभी-कभी अन्य व्यंजनों) को डालकर उस अवधारणा पर आधारित अलग-अलग अर्थों के शब्द बनाए जाते हैं। त्रि-व्यंजनीय (triconsonantal, तीन व्यंजनों वाली) जड़ें सबसे आम हैं, हालांकि चार-व्यंजनीय (quadriconsonantal) जड़ें भी कहीं-कहीं मिलती हैं।आम बोलचाल की हिन्दी, पंजाबी, कश्मीरी, फ़ारसी व तुर्की भाषाओं में बहुत से अरबी-मूल के शब्द हैं इसलिए इन शब्द जड़ों के उदाहरण इन भाषाओं में भी दिखते हैं। उदाहरण के लिए अरबी में: किताब (पुस्तक), कुतुब (पुस्तकें), कातिब (लेखक), कुत्ताब (कई लेखक), कतबा (उसने लिखा), मकतूब (लिखा हुआ), यकतुबू (वह लिखता है) - सभी 'क-त-ब' के व्यंजनों के बीच में स्वर बदलकर बनाए जाते हैं। यह 'क-त-ब' की त्रिव्यंजनीय जड़ 'लिख' की अवधारणा बताती है।

सामीती लोग

सामीती लोग (अंग्रेज़ी: Semitic, सेमेटिक) मध्य पूर्व से उत्पन्न हुई उन मानव जातियों को कहा जाता है जो किसी सामी भाषा को अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं। इन भाषाओं में इब्रानी भाषा, अरबी भाषा, अक्कादी भाषा, आरामाई भाषा, गिइज़ भाषा, फ़ोनीशियाई भाषा और अम्हारिक भाषा शामिल हैं। आधुनिक काल में सामीती लोगों के मुख्य समुदाय अरब लोग और यहूदी लोग हैं। दुनिया भर में सामीती लोगों की आबादी ३५ करोड़ अनुमानित की गई है जिसमें से ३० करोड़ अरब, ३.८ करोड़ इथियोपिया के हबशी लोग, ४०-५० लाख मिज़राही यहूदी लोग, ४२ लाख असीरियाई लोग और १० लाख माल्टा के द्वीप के लोग हैं।

हीब्रू भाषा

REDIRECT#इब्रानी भाषा

विश्व की प्रमुख भाषाएं

अन्य भाषाओं में

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