Bina Etawa

Bina is a town and a municipality in the Sagar district in the Indian state of Madhya Pradesh.[2] Bina is the district headquarters of Sagar District. The city is an important center of economic and industrial activities for the state. It is situated near important places and historical sites such as Bhopal (the capital of Madhya Pradesh),Vidisha, Sanchi and Chanderi. B.O.R.L (Bharat Oman Refinery Ltd.), the only oil refinery of central India is located in Bina, a thermal power plant, and a high voltage power station. This region is famous for its high quality wheat, and Bina is an important agricultural processing center. Bina also contains an important railway junction. The route from Delhi-Mumbai and from Katni-Kota passes through the Bina Railway Junction. Furthermore, Malkheri Railway Junction is also located in Bina.

Historically, Bina Etawa is famous for the city Eran which is located near the city along the bank of the Bina River. Eran was the capital of Airikina Pradesha or Airkina Vishaya, an administrative division of the Gupta empire. It is among the oldest cities found in the region.

Bina

Bina
Bina is located in Madhya Pradesh
Bina
Bina
Location in Madhya Pradesh, India
Coordinates: 24°10′48″N 78°12′0″E / 24.18000°N 78.20000°ECoordinates: 24°10′48″N 78°12′0″E / 24.18000°N 78.20000°E
Country India
StateMadhya Pradesh
DistrictSagar
Area
 • Total42 km2 (16 sq mi)
Elevation
413 m (1,355 ft)
Population
(2011)
 • Total207,193[1]
Languages
 • OfficialHindi
Time zoneUTC+5:30 (IST)
PIN
470113
Vehicle registrationM.P-15

History

Bina city was earlier known as Etawa. Etawa is the name of the village earlier present in the area. Later in 1923, Bina Railway Junction was founded in the area with its name derived from the Bina River flowing nearby. The new name was chosen to dismiss any ambiguity between the Itawa located in Uttar Pradesh. Later all administrative documents started using the name Bina-Etawa, and therefore, the municipal corporation was also named as Bina-Etawa Municipal Corporation.

Khimlasa Bina
Khimlasa Bina

Also the Khimlasa Fort located near the city is an important destination to understand the history of the region. Khimlasa is said to have been founded by a Mohammedan noble and was the mahal in the sarkar of Raisen of the subah of Malwa. The town of Khimlasa is enclosed within a fortified wall built of stone rubble more or less coursed.[3]

एरण बीना मध्यप्रदेश INDIA

  1. ऐतिहासिक ताम्रपाषण कालीन संस्कृति

- संकलित लेख

  1. एरण बीना मध्यप्रदेश का ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल है ! यह म.प्र. के सागर जिले की बीना तहसील में बीना नदी से लगा हुआ समृद्ध नगर था ! वर्तमान नाम एरन जो अब गांव के रुप में है ! यह बीना जंक्शन से 25 कि.मी. और सागर से 90 कि.मी. दूरी पर है ! एरण नाम रखे जाने का एक कारण बीना नदी और बेतवा नदी के संगम पर अत्याधिक मात्रा में उगने वाली "एराका" नामक घास के कारण रखा गया ! यह घास प्रदाह प्रशामक तथा मंदक गुणधर्म वाली होती है ! एक अन्य कारण ऐरण से प्राप्त सिक्कों पर नाग चित्र हैं ! अत: इस स्थान का नामकरण "एरिका" अर्थात नाग से हुआ ! प्राचीन काल में ऐरण पर नागवंश के शासकों का अधिकार था !

एरण के प्राचीन काल के इतिहास के बारे में मिले पुरातात्वीय अवशेष हालाकि गुप्तकाल के हैं ! लेकिन यहाँ मिले सिक्कों से ज्ञात होता है कि ईसा पूर्वकाल में भी यह स्थान आबाद था ! एरण के बारे में माना जाता है कि यह नगर गुप्तकाल में एक महत्वपूर्ण नगर था ! प्राचीन संदर्भ ग्रंथों के अनुसार *जनरल कनिंघम ने सर्वप्रथम प्राचीन एरिकिण नगर की पहचान एरण से की ! एरण को स्वभोग नगर कहा जाता था ! कुछ विद्वानों के अनुसार एरण जेजक भुक्ति की राजधानी रहा है ! विष्णु स्तंभ पर उत्कीर्ण लेख में गुप्त संवत 16, ( 464 ईस्वी ) अंकित है ! इस लेख के अनुसार गुप्त सम्राट बुद्धगुप्त के राज्यकाल में नर्मदा और यमुना नदियों के बीच वाले प्रदेश के शासक सुरश्मिचंद्र थे ! एरण के प्रादेशिक शासक मातृविष्णु थे ! मातृविष्णु और उनके भाई धन्यविष्णु द्वारा 47 फीट ऊचे एक ही पत्थर के बने, *विष्णु स्तंभ" का निर्माण कराया गया ! उत्खनन से प्राप्त वस्तुओं, सिक्कों आदि से पता चलता है कि एरण स्वतंत्र राज्य के रुप में स्थापित था ! एरण में ईसापूर्व सभ्यता के अवशेष व मूर्ति शिल्प प्राप्त हुए हैं ! एरन में भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों की मूर्ति प्राप्त हुई है ! इससे प्रमाणित होता है ! कि भगवान विष्णु के अनुयायी का लम्बे समय तक एरण क्षेत्र में शासन रहा !

  • एरण की स्थिति भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही है ! यह एक ओर बुंदेलखंड का प्रवेश द्वार है दूसरी ओर मालवा का प्रवेश द्वार है ! पूर्वी मालवा सीमा पर स्थित होने के कारण यह दशार्ण को चेदी जनपद से जोडता था ! सैनिक नियंत्रण की दृष्टि से भी एरण को गुप्त वंश के शासकों ने अच्छा माना ! एरण प्राचीन महापथ जो कि उज्जैन से साँची तक जाता था के समीप मार्ग पर स्थित है !
  • ऐतिहासिक महत्व को इस स्थान के उत्खनन में यहाँ के टीलों से प्राप्त सामग्री, मृदभांड एवं #स्तरविन्यास के आधार पर ज्ञात संस्कृतियां #ताम्रयुग से लेकर #उत्तरमध्यकाल तक का #क्रमिकइतिहास बनाती है ! पुरातात्विक साक्ष्यों से पता चलता है कि एक समय में एरण एक वैभवशाली नगर हुआ करता था ! यहाँ की वास्तुकला तथा मूर्तिकला को हमेशा एक विशेष मान्यता दी गयी है ! कनिंघम ने यहाँ से प्राप्त मुद्राओं को तीन भागों में वर्गीकृत किया है ! आहत मुद्रायें, ठप्पाकिंत मुद्रायें, तथा सांचे द्वारा निर्मित मुद्रायें ! इन मुद्राओं में हाथी, घोडा, वेदिका, वृक्ष, इन्द्रध्वज, वज्र, उज्जैन चिंह्र, मत्स्य, कच्छप आदि चिंह्र प्रमुख हैं ! प्राचीन काल में एरण में मुद्रा टकसाल थे ! एरण में पुराअवशेषों का विशाल संकलन है ! खंडहर रुप में डांगी शासकों द्वारा बनवाये गये किले के अवशेष मौजूद हैं !
  • एरण के पास स्थित पहलेजपुर गांव में अष्टकोणीय स्तंभ है ! इसका शीर्ष भाग गोलाकार है ! जिस पर सती प्रथा के सम्बन्ध में भारत में ज्ञात सबसे प्राचीनतम लेख उत्कीर्ण है !
  • एरण से प्राप्त अभिलेखों में प्रमुख अभिलेख है -
  • शक शासक श्रीधर वर्मन अभिलेख
  • गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त का अभिलेख
  • गुप्त सम्राट बुद्धगुप्त का अभिलेख
  • हूण शासक तोरभाण का अभिलेख
  • गुप्त सम्राट भानुगुप्त का समकालीन अभिलेख (गोपराज सती स्तंभ अभिलेख)
  • एरण में मूर्ति शिल्प -
  • 1. वाराह मूर्ति - एरण में विष्णु अवतार महावाराह प्रतिमा जो #भारत में प्राचीन सबसे विशाल बडी प्रतिमा है !

जिसकी ऊचाई लगभग 10 फीट है ! इसका निर्माण एक मीटर ऊचे पत्थर के चबूतरे पर किया गया है ! उसके गले में चारों ओर एक पट्टे पर उत्कीर्ण छोटी छोटी मानव आकृतियों की एक माला है ! शरीर छोटी छोटी वर्तुलाकार अलंकरणों से आच्छादित है ! नारी के रुप में प्रस्तुत की गयी पृथ्वी को दाहिने दांत से सहारा देकर ऊपर उठाया हुआ दर्शाया गया है ! पृथ्वी प्रतिमा का कंधे वाला भाग खंडित है ! स्त्री रुप स्पष्ट दिखाई देता है ! वाराह के पीठ और कंधों और चारों पैरों पर सामने की ओर कमंडल लिए हुए ऋषियों / देव आकृतियां उत्कीर्ण हैं और राशियों का चित्रण है ! दक्षिण दिशा की ओर से देखने पर एक दांत स्पष्ट रुप से दिखाई देता है !

  • वाराह के वक्ष के सामने भाग पर #धन्यविष्णु का आठ पक्तियों का एक लेख ब्रम्ही लिपी में लिखा है ! जिसमें एरण के प्रादेशिक शासक #मातृविष्णु द्वारा मंदिर बनवाये जाने का उल्लेख है !
  • 2. विष्णु प्रतिमा - पूर्व मुखी भगवान विष्णु की आदम कद प्रतिमा जिसकी ऊचाई लगभग 8 फीट है ! इसका निर्माण एक मीटर ऊचे पत्थर के चबूतर पर किया गया है ! उक्त मूर्ति वाराह प्रतिमा के समान्तर है ! एरण की गुप्तयुगीन विष्णु प्रतिमा में गोलाकार प्रभा मंडल शैल के विकसित स्वरुप का प्रतीक है !
  • 3. विष्णु मंदिर - विष्णु प्रतिमा के सामने ही चार स्तंभों पर खंडित मंदिर स्थित है ! इसके दोनो ओर गंगा यमुना की खंडित मूर्तियां हैं ! नाग पाश की आकृतियां अंकित हैं ! मंदिर के तीनों स्तंभों पर नाग पाश की आकृति उत्कीर्ण हैं ! मंदिर के मध्य भाग में गरुण की खंडित प्रतिमा है !
  • 4. नरसिंह प्रतिमा - पूर्व मुखी नरसिंह की आदमकद प्रतिमा जिसकी ऊचाई लगभग आठ फीट है ! एक मीटर ऊचे पत्थर के चबूतरे वाराह और विष्णु प्रतिमा के समानान्तर लेटी हुई अवस्था में रखा गया है ! उक्त प्रतिमा वर्तमान में खंडित अवस्था में है !
  • 5. विष्णु स्तंभ - यह एक ही पत्थर का बना 47 फीट ऊचा स्तंभ है ! स्तंभ का निचला भाग बीस फीट जो वर्गाकार है ! चौडाई दो फीट गुणित 10.25 है ! बीस फीट के ऊपर का भाग अष्टकोणीय है ! इसके ऊपर झालरदार घंटाकृति है ! जिसके ऊपर स्तंभ शीर्ष एक वर्गाकार तराशे हुए पत्थर पर रखा है ! शीर्ष पर पूर्व और पश्चिम मुखी एक दूसरे के विपरीत दिशा में सर्प पकडे हुए गरुण की मानव आकृति की प्रतिमा विद्यमान है ! शीर्ष वर्गाकार पत्थर पर चारों कोनों पर चार शेर की आकृति हैं ! जो देखने में आठ शेर होना प्रतीत होते हैं ! स्तंभ के पश्चिम दिशा में उत्कीर्ण लेख में गुप्त संवत 165,

(464 ईसवी)अंकित है ! इस लेख के अनुसार गुप्त सम्राट बद्धगुप्त के राज्यकाल में यमुना और नर्मदा के बीच वाले प्रदेश के शासक सुरश्मिचंद थे ! एरण के प्रादेशिक शासक मातृविष्णु थे ! उनके छोटे भाई धन्यविष्णु द्वारा विष्णुस्तंभ का निर्माण कराया गया !

  • 6. द्वीप स्तंभ - विष्णुस्तंभ के समान्तर एक पत्थर के चबूतरे पर गोलाई में लगभग 15 फीट ऊचाई का स्तंभ स्थित है ! जिसका ऊपरी हिस्सा वर्गाकार है ! जिस पर स्तंभशीर्ष उपलब्ध नहीं है !
  • 7. अन्य स्तंभ - विष्णु स्तंभ या गरुड स्तंभ के समीप ही दक्षिण दिशा में ध्वस्त मंदिर के भग्नावेश मंदिर निर्माण के स्तंभों को एक जगती पर खडा किया गया है ! इन स्तंभों पर मंगल घट, कीर्तिमुख, पत्रावली आदि का चित्रण है ! इन स्तंभों के नीचे जो आधार है ! उन पर अनेक पौराणिक दृश्य जिनमे कृष्णलीला से संबंधित दृश्य उत्कीर्ण हैं !
  • 8. अष्टकोणीय स्तंभ - ऐरण के समीप आधामील दूरी पर पहलेजपुर में एक दूसरा अष्टकोणीय स्तंभ है ! इसका शीर्ष भाग गोलाकार है ! जिस पर #भारत में प्रथम ज्ञात सती लेख उत्कीर्ण है !
  • 9. विष्णु वाराह प्रतिमा - एरण के समीप बीना नदी के तट पर विष्णु की वाराह प्रतिमा प्राप्त हुई है ! प्रतिमा का मुख वाराह का नीचे का शेष शरीर मानव का है ! उक्त प्रतिमा पर अंकित ब्रह्मी लिपी लेख से ज्ञात होता है कि महेश्वरदत्त तथा वाराहदत्त के द्वारा मूर्ति की स्थापना चौथी शताब्दी के उत्तरार्द्ध में करायी गयी थी ! वर्तमान में यह मूर्ति डाँ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के संग्रहालय में संरक्षित है !
  • 10. महिषामर्दिनी देवी प्रतिमा, गुप्तकाल - एरण के उत्खनन में गुप्तकालीन महिषामर्दिनी देवी की प्रतिमा प्राप्त हुई है ! जो वर्तमान में डाँ हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय में सुरक्षित है !

मातृविष्णु तथा धन्यविष्णु नामक भाईयों ने विष्णु का ध्वजस्तंभ बनवाया था ! उनकी एक पीढी के बाद हूणों ने एरण पर आक्रमण किया ! उस बडे युद्ध में गुप्त राजा भानुगुप्त की पराजय हूई ! उनके सेनापति गोपराजा वीरगति को प्राप्त हुए ! हूण राजा तोरमाण ने भानुगुप्त को पराजित किया ! नृवाराह की मूर्ति प्रारंभिक गुप्तकाल के बाद की है ! जिससे प्रतीत होता है कि हूण राजा तोरमाण के बाद पुन: गुप्तवंश के राजाओ द्वारा पुन: एरण को वापस जीत लिया था ! समुद्रगुप्त के एरण अभिलेख में लिखा है - "स्वभोग नगर ऐरिकरण प्रदेश !" अर्थात स्वभोग के लिए समुद्रगुप्त ऐरिकिण जाता रहता था !

संदर्भ स्त्रोत -

  • मोहन लाल एरण की ताम्रपाषण संस्कृति सागर, 2009
  • नागेश दुबे, मोहन लाल एरण एक परिचय अरकंटक 2016
  • मोहन लाल एरण एक सांस्कृतिक धरोहर 2016
  • ऐतिहासिक एरण

नोट - यह संकलित लेख जनसामान्य के एरण की महान विरासत के प्रति जोडने जागरुक बनाने के उद्देश्य से साभार संकलित है ! ऐतिहासिक तथ्यात्मक जानकारी हेतू विषय विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं की जानकारी को ही आधार बनाया जाये !

  • संकलित लेख साभार,
संकलन - उदयभान कुशवाहा बीना 470113

Industry and economics

BinaRefinery
Bina Refinery

Bharat Oman Refineries Limited (BORL), a company promoted by Bharat Petroleum Corporation Limited (BPCL) with equity participation from Oman Oil Company S.A.O.C (OOC) had set up a 6 MMTPA grass root refinery at Bina. Bina Refinery has adopted state-of-the-art technologies designed to process Arab Mix crude (65% Arab Light and 35% Arab Heavy). It also had the flexibility to process other types of Middle East crude. The project also includes a Pet Coke-based Captive Cogeneration Power Plant (CPP) of 99 MW (33 x 3).[4]

A 1200 MW Bina Thermal Power Plant by JAYPEE Group is also under construction. A part of the plant, with capacity of 500 MW has already started working. Also a Cement Manufacturing Plant was also proposed by the JAYPEE group in Bina.[5]

A 1200kV National Test Station at Bina under PPP model by Powergrid corporation in collaboration with 35 Indian manufacturers along with National High Power Test Laboratory Pvt. Ltd. (NHPTL), Joint Venture Company is state-of-the-art "On Line High Power Short Circuit Test Facility" is also located in Bina.[6]

Apart from this, the government of Madhya Pradesh is planning to build an investment corridor between Bina-Bhopal and termed it as Bina-Bhopal Investment Corridor. Under this project, investments of around US$1 bn is expected around the verticals of Chemicals, Electrical Equipments, Fabricated metal Production, machinery and equipments. Along with it, Integrated township projects were also proposed near the city.[7]

The region is also home for some agricultural produce processing units and agricultural machinery manufacturing units. The wheat produced in the region one is of the finest produced in the world and is considered the best wheat produce.

Geography

Bina-Etawa is situated at 24°10’ N latitude and 78°10’ E longitude at the about 412 m above the mean sea level. The Bina (river) and Betwa Rivers are the major sources of water in the area. The agricultural land is primarily black soil.

Climate

Winter season starts from November to the end or middle of February and Summer season starts from March to the middle of June. Minimum temperature recorded in the city is 1 °C in January. Whereas the Maximum temperature in May is 48.0 °C. Average rainfall is around 1235/mm annually. In monsoon the wind-direction is from south-west and in winter the wind direction is normally from the northeast of the city.

Education

Bina Etawa has an average literacy rate of 73%, higher than the national average. Government College for post-graduation and graduation courses and Government Girls College providing graduation courses for girls are two important centers for higher education. Besides this Kendriya Vidyalaya Bina is the major centre for school education. Three State Government Schools provide education for the city's students. Some private schools also operate in the city.

Religious sites

NisaiJiBina
NisaiJiBina

The city is home to a number of temples and other historical sites. Jains and Hindus are the majority population in the area. Nisai Ji located near the bank of river Betwa is a notable religious site. The shrine of Shri Taaran Taran founder of Taaran Taran Panth of Jainism is located at this place. In the city, Anekant Gyan Mandir, a Jain organisation, is preserving some of the oldest manuscripts related to Jainism, apart from preserving, electronic copies for these manuscripts were also created by the organisation.[8] Maa Jageshwari Shaktipeeth is famous for the temple of Goddess Durga. A Saibaba Mandir is also located in the campus of Maa Jageshwari Shaktipeeth. Some important religious events includes the Annual Palki Yatra of Maa Jageshwari, organised on the first day of Navratri. Also the Sai Baba Palki Yatra is organised on 14 February of every year.

See also

References

  1. ^ "Bina- Etawa Population". Census 2011. census2011.co.in. Retrieved 13 April 2017.
  2. ^ "Re-classification of cities/towns on the basis of 2017 Census". Archived from the original on 27 October 2013. Retrieved 9 February 2013.
  3. ^ "Archived copy". Archived from the original on 14 January 2013. Retrieved 2013-11-04.CS1 maint: Archived copy as title (link)
  4. ^ [1]
  5. ^ "Archived copy". Archived from the original on 25 November 2013. Retrieved 2013-11-04.CS1 maint: Archived copy as title (link)
  6. ^ "Archived copy". Archived from the original on 15 May 2013. Retrieved 4 November 2013.CS1 maint: Archived copy as title (link)
  7. ^ [2]
  8. ^ [3]
Bhopal–Bina Passenger

The Bhopal–Bina Passenger is a passenger train of the Indian Railways, which runs between Bhopal Junction railway station of Bhopal, the capital city of Madhya Pradesh and Bina Junction railway station of Bina, in the Central Indian state Madhya Pradesh

Bina

Bina may refer to:

Binə, Baku,

Binə, Khojavend,

Bíňa, Slovakia

Bina Etawa, India

Bina Railway Colony, India

Bina (river), Germany

Bina (Vidhan Sabha constituency)

Bina Vidhan Sabha constituency is one of the 230 Vidhan Sabha (Legislative Assembly) constituencies of Madhya Pradesh state in central India. This constituency is reserved for the candidates belonging to the Scheduled castes since 2008, following the delimitation of the Legislative Assembly constituencies.

Bina Thermal Power Plant

Bina Thermal Power Plant is a coal based thermal power project located at Bina Etawa in Sagar district in Indian state of Madhya Pradesh. The power plant is one of the coal based power plants of Jaypee Group. Current talks of this power plant being sold to Jindal owned JSW Energy are under progress.

Chanderi

Chanderi, is a town of historical importance in Ashoknagar District of the state Madhya Pradesh in India. It is situated at a distance of 127 km from Shivpuri, 37 km from Lalitpur, 55 km from Ashok Nagar and about 45 km from Isagarh. It is surrounded by hills southwest of the Betwa River. Chanderi is surrounded by hills, lakes and forests and is spotted with several monuments of the Bundela Rajputs and Malwa sultans. It is famous for ancient Jain Temples.

Its population in 2011 was 33,081.

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People are listed by their first names.

LGBT rights in India

Lesbian, gay, bisexual and transgender (LGBT) people in India face legal and social difficulties not experienced by non-LGBT persons. Over the past decade, LGBT people have gained more and more tolerance in India, especially in large cities. Nonetheless, most LGBT people in India remain closeted, fearing discrimination from their families, who might see homosexuality as shameful. Discrimination is particularly present in rural areas, where LGBT people often face rejection from their families and forced opposite-sex marriages.Sexual activity between people of the same gender is legal but same-sex couples cannot legally marry or obtain civil partnerships. On 6 September 2018, the Supreme Court of India decriminalised homosexuality by declaring Section 377 of the Indian Penal Code unconstitutional.Since 2014, transgender people in India have been allowed to change their gender without sex reassignment surgery, and have a constitutional right to register themselves under a third gender. Additionally, some states protect hijras, a traditional third gender population in South Asia, through housing programmes, welfare benefits, pension schemes, free surgeries in government hospitals and others programmes designed to assist them. There are approximately 4.8 million transgender people in India.

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