भाषा बिज्ञान

भाषा बिज्ञान (अंग्रेजी:Linguistics) एगो बिज्ञान बाटे जेवन भाषा के अध्ययन करे ला।

अंगरेजी

अंगरेजी, भा अंगरेजी भाषा (English language) मूल रूप से इंग्लैंड क भाषा हवे जेवन अब हर ओ देश में बोलल जात बा जहाँ जहाँ अंग्रेज लोग राज कइलें। आज अमेरिका, आस्ट्रेलिया आ न्यूज़ीलैंड जइसन देशन में ई मुख्य भाषा बा आ भारतीय क्षेत्र में भी ए भाषा क प्रचलन बहुत बा। भारत के मिजोरम नीयन कुछ राज्यन में ई सरकारी भाषा हवे।

भाषा बिज्ञान के बँटवारा के हिसाब से अंगरेजी एगो पच्छिमी जर्मनिक भाषा हवे जे मध्यकालीन इंग्लैंड में बोलल जाय आ अब बैस्विक रूप से संपर्क भाषा (लिंग्वा फ़्रैंका) बन चुकल बा। प्राचीन काल में जर्मनिक मूल के एंगल्स नाँव के एगो जनजाति उत्तर-पूरुब दिशा से प्रवास क के इंग्लैंड आइल रहे जिनहन लोग के नाँव में एह भाषा के नाँव के जरि बा। अंतिम रूप से एह भाषा के नाँव बाल्टिक सागर में मौजूद एंग्लिया या एंग्लेन नाँव के प्रायदीप के नाँव पर पड़ल। अपना उच्चारण आ ब्याकरण के हिसाब से ई फ्रायसियन भाषा से सभसे नजदीक हवे, हालाँकि, एकरे शब्दभंडार में कई गो जर्मनिक भाषा सभ के परभाव सुरुआती मध्यकाल में पड़ल आ बाद में एह पर रोमांस भाषा सभ, खासतौर पर फ्रांसीसी आ लैटिन भाषा, के परभाव बहुत ढेर पड़ल।

आइएसओ 639

आइएसओ 639 इंटरनेशनल स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन द्वारा बनावल एक प्रकार के आइएसओ कोड बाटे जे सब भाषा खातिर इस्तेमाल होला।

आबूगीडा

आबूगीडा (अंगरेजी: Abugida) एक किसिम के लिखाई ब्यवस्था सभ हईं जिनहना में व्यंजन आ स्वर के एकसाथ मिला के लिखल जाला। ई अल्फाबेट वाला सिस्टम, जेह में स्वर आ व्यंजन दुनों के खातिर चीन्हा होला आ अलग-अलग लिखल जाला; या ऐब्जाद सिस्टम जेह में स्वर के लिखल कौनों जरूरी ना होला, से अलग किसिम के हईं। उदाहरन खातिर देवनागरी लिखाई में "क्" एक ठो व्यंजन हवे जेह में स्वरन के अलग अलग मात्रा लगा के "क", "का", "कि", "को" नियर लिखल जाला जबकि अंगरेजी अल्फाबेट वाला सिस्टम हवे जेह में "कि" लिखल जाई त "ki" दू गो अक्षर से लिखल जाई।

आबूगीडा नाँव के इस्तेमाल पीटर टी॰ डेनियल्स द्वारा 1990 में लिखाई सभ के किसिम बतावे में कइल गइल। ई वास्तव में इथियोपिया के गी'ज भाषा के शुरुआती चार गो अक्षर (आ, बू, गी, डा) से बनल नाँव हवे; ठीक ओइसहीं जइसे अल्फ़ा आ बीटा नाँव के पहिला दू गो यूनानी अक्षर से "अल्फाबेट" शब्द बनल हवे, या भोजपुरी में पहिला व्यंजन "क" के आधार पर अक्षर सभ के "ककहरा" कहल जाला।

देवनागरी, कैथी नियर ब्राह्मी परिवार के सगरी लिखाई सभ आबूगीडा किसिम के हईं।

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश या यूपी भारत क सभसे ढेर जनसंख्या वाला राज्य आ दुनिया में सभसे ढेर जनसंख्या वाला देस-उपबिभाग बाटे। भारतीय उपमहादीप के उत्तरी-बिचला इलाक में पड़े वाला एह राज्य के कुल आबादी लगभग 200 मिलियन (2 अरब) बाटे। लखनऊ एह राज्य के राजधानी हवे।

ब्रिटिश शासन के दौरान 1 अप्रैल 1937 के यूनाइटेड प्रोविंस के नाँव से ई प्रदेश के रूप में बनावल गइल आ आजादी के बाद 1950 में एकर नाँव बदल के उत्तर प्रदेश रखाइल। 9 नवंबर 2000 के एह राज्य से उत्तरी पहाड़ी इलाका के अलग क के उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) राज्य बनल। वर्तमान में, प्रशासन खातिर ई अठारह गो मंडल आ 75 जिला में बिभाजित कइल गइल बा।

भूगोलीय रूप से ई राज्य गंगा के मैदान के सपाट हिस्सा में स्थित बा आ इहाँ उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु पावल जाले। राज्य के पछिम ओर राजस्थान; उत्तर-पच्छिम में हरियाणा, दिल्ली आ हिमाचल प्रदेश; उत्तर में उत्तराखंड आ नेपाल; पूरुब ओर बिहार आ दक्खिन ओर मध्य प्रदेश बाड़ें; जबकि एकदम दक्खिन-पूरुब के छोर पर एकर कुछ सीमा झारखंड आ छत्तीसगढ़ के साथ भी सटल बा। कुल 243,290 बर्ग किलोमीटर (93,933 बर्गमील) रकबा वाला ई राज्य भारत के 7.33% भाग हवे आ चउथा सबसे बड़ राज्य भी हवे।

अर्थब्यवस्था के आकार के मामिला में ई भारत के तीसरा सभसे बड़ राज्य बा जहाँ जीडीपी ₹9,763 बिलियन (US$150 बिलियन) बाटे। खेती आ सर्विस क्षेत्र प्रमुख आर्थिक कामकाज बाड़ें; सर्विस सेक्टर में परिवहन, पर्यटन, होटल, अचल संपत्ति, इंशोरेंस आ फाइनेंस संबंधी चीज सामिल बाटे। गाजियाबाद, बुलंदशहर, कानपुर, गोरखपुर, इलाहाबाद, भदोही, रायबरेली, मुरादाबाद, बरेली, अलीगढ़, सोनभद्र, आ बनारस एह राज्य में औद्योगिक रूप से महत्व वाला शहर बाने।

प्राचीन आ मध्य्कालीन दौर में उत्तर प्रदेश ताकतवर राज सभ के भूमि रहल बा। इहाँ प्राकृतिक आ इतिहासी पर्यटन के कई जगह बा जइसे की आगरा, बनारस, कौशांबी, बलियाँ, श्रावस्ती, गोरखपुर, कुशीनगर, लखनऊ, इलाहाबाद इत्यादि। धार्मिक रूप से हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख शाखा वैष्णव मत के दू गो अवतार राम आ कृष्ण एही राज्य में पैदा भइल बतावल जालें आ अजोध्या आ मथुरा प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थ हवें। गंगा के तीरे बसल बनारस आ गंगा आ यमुना नदी के संगम पर मौजूद इलाहाबाद के हिंदू धरम में बहुत महत्व बा। दूर उत्तर-पूरुब कोना पर मौजूद गोरखपुर नाथ सम्प्रदाय के संस्थापक गोरखनाथ के भूमि मानल जाले।

कैथी (युनिकोड ब्लॉक)

कैथी एक ठो युनिकोड ब्लॉक बाटे जेह में अइसन अक्षर सभ बाने जे पुरनका समय में उत्तर भारत में आम चलन में रहलें। कैथी लिखाई के इस्तमाल भोजपुरी, हिंदी, उर्दू, मैथिली , अवधी नियर भाषा सभ के लिखे खातिर होखे।

डोगरी भाषा

डोगरी भारत आ पकिस्तान के पहाड़ी इलाका सभ में बोलल जाए वाली एगो भाषा बा। ई भाषा बिज्ञान के बर्गीकरण में इंडो-आर्यन भाषा सभ के उत्तरी समूह के पच्छिमी पहाड़ी उपसमूह में आवे ले।

देसभाषा

देसभाषा, देसी भाषा, जनभाषा या वर्नाक्यूलर अइसन भाषा या बोली के कहल जाला जे कौनों खास समुदाय या भूगोलीय इलाका के लोग द्वारा (अनौपचारिक रूप से) बोलल जाए वाली भाषा होखे, जबकि ओ लोग के साहित्य के भाषा, राष्ट्रभाषा, मानक भाषा या संपर्क भाषा कौनों दूसर होखे। कई लोग वर्नाक्यूलर के इस्तेमाल नॉन-स्टैंडर्ड डायलेक्ट, यानि अइसन बोली जेकरा मानक दर्जा न मिलल होखे, खातिर करे ला।

निवासी नाँव

निवासी नाँव भा वासीनाम (अंगरेजी: Demonym) कौनों जगह भा क्षेत्र के लोग के पुकार नाँव के कहल जाला जे ओह जगह के नाँव पर पड़ल होखे।

अकसर ई नाँव जगह के नाव में कुछ प्रत्यय जोड़ के बने ला। उदाहरण खातिर -ई जोड़ के इलहाबाद से इलाहाबादी, बनारस से बनारसी, आ बंगाल से बंगाली इत्यादि। एकरे अलावा -इहा, -इया आ -टिक प्रत्याय भी जोड़ के अइसन नाँव बनावल जाला। जैसे कि गाजिपुरिहा या गाजिपुरिया इत्यादि।

पाणिनि

महर्षि पाणिनि (6वीं सदी ई.पू. से 4थी सदी ईसापूर्ब के बीच) एगो प्राचीन भारतीय भाषाशास्त्री, वैयाकरण आ बिद्वान रहलें। इनके जनम अस्थान भारतीय उपमहादीप के उत्तरी पच्छिमी हिस्सा में, महाजनपद काल में गांधार के मानल जाला जे वर्तमान में पाकिस्तान देस में बा। पाणिनि के भाषा बिज्ञान के पिता के उपाधि दिहल जाला आ इनके परसिद्धि के कारण इनके ग्रंथ अष्टाध्यायी हवे।

पाणिनि के अष्टाध्यायी सूत्र-शैली में लिखल संस्कृत व्याकरण के ग्रंथ हवे। एह में आठ अध्याय में 3,959 सूत्र बाड़ें जिनहन में व्याकरण आ भाषा बिज्ञान के नियम बतावल गइल बाड़ें। एह ग्रंथ पर बाद के बिद्वान लोग भाष्य लिखल जेह में पतंजलि के महाभाष्य सभसे प्रमुख हवे। अष्टाध्यायी वेदांग के हिस्सा व्याकरण के आधार ग्रंथ हवे आ बाद के सगरी संस्कृत व्याकरण एकरा के आधार मान के चलेला। पाणिनि के भाषा संबंधी व्यवस्था से शाइत परभावित हो के भरत मुनि नाट्य-नृत्य इत्यादि के आपन ग्रंथ लिखलें आ पाणिनि के ग्रंथ पर बौद्ध बिद्वान लोग भी बिचार कइल आ ग्रंथ लिखल।

पाणिनि के बतावल संधि-समास के नियम सभ के आधुनिक भाषा बिज्ञान में भी आधारभूत दर्जा हासिल बा आ ई संस्कृत के ध्वनीशास्त्र के समझे के आधार के रूप में इस्तेमाल होखे लें।

भारत के भाषा

भारत के भाषा सभ कई भाषाई परिवार के बाड़ी स जिनहन में सभसे प्रमुख इंडो-आर्यन परिवार के भाषा बाड़ी जेवन 75 % लोग बोलेला आ दुसरा नंबर पर द्रविड़ भाषा परिवार के भाषा बाड़ी जिनहन के लगभग 20 % लोग बोले ला । अन्य भाषा परिवार सभ में ऑस्ट्रोएशियाटिक, सिनो-तिब्बती आ कुछ अन्य छुटपुट भाषा बाड़ी। इतिहास के लंबा समय में ई भाषा सभ में आपसी लें-देन भी बहुत भइल बाटे।

भाषा

भाषा बातचीत क माध्यम हवे जेकरी सहायता से आदमी एक दुसरा से आपन बात कह पावेला आ आपन विचार आ भावना जाहिर क पावेला।

भाषा के दूसरी कई गो माध्यम में बदलल ज सकेला जइसे लिखावट में, चित्र में, ब्रेल लिपि में या साउंड रिकार्डिंग क के।

भाषा की बारे में जवना शास्त्र में पढ़ल जाला ओके भाषा विज्ञान कहल जाला।

भाषा क संबंध साहित्य आ दर्शन से बा। एक भाषा से दुसरे भाषा में बदलाव के अनुवाद भा भाषांतर कहल जाला।

भाषा परिवार

आपस में सम्बन्धित भाषावन के भाषा-परिवार कहल जायेला। कउन भाषाकुल कउन परिवार में आवेला, एकर वैज्ञानिक आधार बा।

इस समय संसार के भाषावन के तीन अवस्थाकुल बाडें। विभिन्न देशवन के प्राचीन भाषावन जेकर अध्ययन आ वर्गीकरण पर्याप्त सामग्री के अभाव में नईखे हो सकल, पहलीका अवस्था में बा। इकुल के अस्तित्व इमें उपलब्ध प्राचीन शिलालेखवन, सिक्कवन आ हस्तलिखित पुस्तकवन में अभी सुरक्षित बा। मेसोपोटेमिया के पुरान भाषा ‘सुमेरीय’ तथा इटली क प्राचीन भाषा ‘एत्रस्कन’ एही तरह की भाषाकुल हवें। दूसर अवस्था में अईसन आधुनिक भाषाकुल हवें, जेके सम्यक् शोध के अभाव में अध्ययन आ विभाजन प्रचुर सामग्री के होते हुए भी नईखे हो सकल। बास्क, बुशमन, जापानी, कोरियाई, अंडमानी आदि भाषाकुल एही अवस्था में बाड़ें। तीसरका अवस्था के भाषावन में पर्याप्त सामग्री बा आ उका अध्ययन एवं वर्गीकरण हो चुकल बा। ग्रीक, अरबी, फारसी, संस्कृत, अंगरेजी आदि अनेक विकसित एवं समृद्ध भाषाकुल इके अन्तर्गत आवेलें।

भोजपुरी साहित्य

भोजपुरी साहित्य में अइसन सगरी साहित्य के रखल जाला जवन भोजपुरी भाषा में रचल गइल बाटे। गोरखनाथ, कबीरदास आ दरिया साहेब नियर संत लोगन के बानी से सुरुआत हो के भिखारी ठाकुर आ राहुल बाबा के रचना से होत भोजपुरी साहित्य के बिकास आज कबिता, कहानी, उपन्यास आ ब्लॉग लेखन ले पहुँच गइल बाटे। आधुनिक काल के सुरुआत में पाण्डेय कपिल, रामजी राय, भोलानाथ गहमरी नियर लोगन के रचना से वर्तमान साहित्य के रीढ़ मजबूत भइल बा।

भोजपुरी भाषा आ साहित्य के इतिहास लिखे वाला लोगन में ग्रियर्सन, राहुल बाबा से ले के उदय नारायण तिवारी, कृष्णदेव उपाध्याय, हवलदार तिवारी आ तैयब हुसैन 'पीड़ित' नियर बिद्वान लोगन के योगदान बा। अर्जुन तिवारी के लिखल एकरा साहित्य के इतिहास भोजपुरी भाषा में मौजूद बा।

लिखाई

लिखाई या लिपि (अंगरेजी: Writing system) कौनों भी अइसन तरीका ह जेवना द्वारा बोलल जा सके वाला चीज के देखल जा सके लायक रूप में जाहिर कइल जाला। भाषा के बोलल जाए वाला रूप आ लिखल जाए वाला रूप में से लिखाई के इस्तमाल से लिखल रूप के फायदा ई होला की एह तरह से कौनों बात के सहेज के रखल भी जा सके ला आ एक जगह से दुसरा जगह भेजल जा सके ला।दुनिया में कई तरह के लिखाई के सिस्टम मौजूद बाड़ें। कुछ अल्फाबेट आ अच्छर के इस्तमाल से जबकि कुछ चित्र के इस्तमाल से भाषा के लिखे के काम आवे लें। लैटिन लिखाई अल्फाबेट सिस्टम आधारित हवे, जबकि भारत में चलन में ज्यादातर लिखाई सब आबूगीडा प्रकार के सिस्टम हवें जिनहन में स्वर आ व्यंजन के एक साथ मिला के लिखल जाला।

व्याकरण

भाषा बिज्ञान में व्याकरण अइसन संरचनात्मक नियम सभ के समूह हवे जे कौनों प्राकृतिक भाषा के तहत वाक्य, वाक्यांश आ शब्द सभ के बनावट के निर्धारित करे लें। अंगरेजी में एकरा के ग्रामर (अंगरेजी: Grammar) कहल जाला। एह नियम सभ के अध्ययन करे वाली बिद्या के भी व्याकरण कहल जाला।

प्राकृतिक भाषा के बोले वाला व्यक्ति, खासतौर से अगर ऊ भाषा ओह व्यक्ति के मूल भाषा होखे, एह नियम सभ के बचपने में सीख लेला आ ई कौनों अलग ट्रेनिंग भा शिक्षा से ना सीखल जाला बलुक आसपास के लोग के बोलत सुन के सीखल जाला। बाद में शिक्षा द्वारा सीखल जाए वाली भाषा सभ खाती व्याकरण के ज्यादे नियम धियान पूर्वक ओह भाषा संबंधी निर्देश इत्यादि के देख-पढ़ के सीखे के पड़े ला।

व्याकरण शब्द के इस्तेमाल कौनों भाषा के व्याकरण के नियम सभ के बतावे वाली किताब सभ खातिर भी हो सके ला। मने कि अइसन किताब जेह में ओह भाषा के संरचना के मूलभूत नियम बतावल गइल होखें ताकि भरम के स्थिति में किताब के संदर्भ लिहल जा सके, जरूरत पड़े पर किताब में नियम देखल जा सके। ज्यादे विवरणात्मक तरीका से लिखल किताब सभ जिनहन में नियम के साथे-साथ बिस्तृत व्याख्या आ नियम के उत्पत्ती इत्यादि के भी विवेचना होखे विवरणात्मक व्याकरण कहाला।

भाषा बिज्ञान से बहरें, व्याकरण शब्द के इस्तेमाल शब्द के उच्चारण आ लिखाई इत्यादि के खातिर भी हो सके ला। हालाँकि, भाषा बिग्यानी लोग एह सभ के व्याकरण के बिसय ला बलुक ऑर्थोग्राफी इत्यादि के बिसय माने ला।

शब्दइतिहास

शब्दइतिहास भा व्युत्पत्तिशास्त्र (अंगरेजी: Etymology) अइसन बिद्या हवे जे शब्दन के इतिहास के अध्ययन करे ले। कौनों शब्द बिसेस के शब्दइतिहास के मतलब भइल ओह शब्द के उत्पत्ती, उच्चारण बदलाव, बिकास, अर्थबदलाव इत्यादि के ब्याख्या। भारतीय परंपरा में हजारन साल पहिले पैदा भी अध्ययन के शाका निरुक्त में एकर अध्ययन शुरू भइल रहे आ इहे भारतीय भाषा बिज्ञान के मूल हवे।

अंगरेजी में एकरा के एटिमॉलजी कहल जाला आ एह बिद्या के अलावा कौनों शब्द के इतिहास के बिबेचनो के एटिमॉलजी कहल जाला। जगह के नाँव सभ के इतिहास (उत्पत्ती आ विकास) के अध्ययन करे वाली बिद्या के अंगरेजी में टोपॉनमी कहल जाला।

जवना भाषा सभ के लिखाई के लमहर इतिहास रहल बा, बिद्वान लोग पुराना लिखे के तरीका आ हिज्जे इतिहास के अध्ययन करे ला। एह में ओह भाषा के बारे में मौजूद पाठ के भी अध्ययन कइल जाला। एह लिखित चीज सभ के अध्ययन से ई पता लगावे ला कि पहिले एह शब्द के का इस्तेमाल होखत रहे, कइसे एकरे अरथ आ रूप में बदलाव भइल, कब ई एह भाषा में आइल। दुसरे भाषा से आइल शब्द सभ के अध्ययन में तुलनात्मक बिधि के इस्तेमाल भी कइल जाला। तुलनात्मक बिधि भाषा बिज्ञान के अइसन टेकनीक हवे जेह में एकही रूट से आइल शब्द सभ जे अलग अलग भाषा में पावल जालें उनहन के बिकास के अध्ययन एक साथे तुलना कइ के कइल जाला। उदाहरण खाती जादेतर यूरोपीय भाषा सभ के बहुत सारा शब्दन के मूल इंडो-यूरोपियन भाषा सभ के भाषाई परिवार में काफी पाछे तक खोजल जा सके ला। आज्काल्ह के भारतीय आर्य भाषा सभ में भी संस्कृत के धातु इत्यादि तक शब्द के मूल खोजल जा सके ला आ एकरो पाछे ले जा के संस्कृत फ़ारसी इत्यादि के तुलना क के प्रोटो-इंडो आर्य भाषा तक ले के शब्दन के अनुमान लगावल जा सके ला।

संस्कृत

संस्कृत भारतीय उपमहादीप के एगो प्राचीन भाषा हऽ। ई भाषा बिज्ञान के हिसाब से इंडो-यूरोपीय परिवार के भाषा हवे आ एकरे इंडो-आर्यन शाखा में आवे ले। अभिन भी एह भाषा के बोले-समझे वाला लोग मौजूद बा आ एह भाषा में लिखल प्राचीन साहित्य से ले के समकालीन साहित्य तक ले के बिसाल धरोहर मौजूद बा। प्राचीन भारतीय ग्रंथ सभ के रचना एही भाषा में भइल हवे आ बिबिध बिसय सब पर बृहद मात्रा में जानकारी एह भाषा में लिखल प्राप्त होखे ले।

बिकास के क्रम के हिसाब से हे भाषा के दू गो रूप बतावल जाला: वैदिक संस्कृत, जेह में वेद सभ के रचना भइल हवे; आ लौकिक संस्कृत जेह में बाद के साहित्य आ अउरी बिबिध बिसय के ग्रंथ लिखल गइल हवें। संस्कृत भाषा के ई नाँव बिसेस संस्कार, यानी ब्याकरण इत्यादि के हिसाब से खास शुद्ध कइल भाषा, होखे के कारण मिलल हवे आ अपना इतिहास में ई अभिजात वर्ग आ पढ़ल लिखल लोग के भाषा रहल बा। एकरे साथे-साथ आम जनता के भाषा प्राकृत रहल जेकरा में कुछ साहित्य भी मिले ला आ संस्कृत साहित्य में भी एह भाषा के मिलजुल मिले ला।

बाद के कई इंडो-आर्यन भाषा सभ, जइसे कि भोजपुरी, नेपाली, हिंदी, मराठी, बांग्ला इत्यादि के बिकास संस्कृत से होखल बतावल जाला, हालाँकि, एह बात के बिपरीत कई बिद्वान लोग माने ला कि एह भाषा सभ के बिकास संस्कृत के समांतर बोलल जाए वाली प्राकृत सभ से भइल आ संस्कृत के परभाव भर पड़ल।

समास

संस्कृत के भाषा बिज्ञान में समास दू गो भा अधिका पद (शब्द) सभ के एक साथे जुड़ के एक पद के रूप ले लेवे कहल जाला। संस्कृत में अइसन समास बहुत मिले लें जे कई शब्द से मिल के बने लें आ अंतिम वाला में बिभक्ति के इस्तेमाल होला, पूरा चीज एकही पद के रूप में इस्तेमाल होला। संस्कृत में समास के रूप में मौजूद शब्द कबो-कबो दस से ढेर शब्दन से मिल के बनल भी हो सके लें।

हिंदी भाषा

हिंदी भाषा (शाब्दिक अरथ:हिंद के भाषा) मुख्य रूप से भारत के हिंदी प्रदेश में, आ अन्य भाषा के रूप में पूरा भारत आ भारत से बाहर रहे वाला भारतीय लोग द्वारा बोलल जाए वाली एक ठो भाषा हवे। भाषा बिज्ञान के अनुसार ई इंडो-आर्य समूह के भाषा हवे। खड़ी बोली के मानकीकरण से हिंदी आ उर्दू दुनों भाषा सभ के उत्पत्ति मानल जाले, हिंदी भाषा जहाँ संस्कृत से आपन ज्यादातर शब्द लिहले बा ओहिजे उर्दू में ज्यादातर शब्द फ़ारसी आ अरबी मूल के मिलेला। हिंदी-उर्दू के मिलल-जुलल रूप, जवन काफी संख्या में आम जन के आ सिनेमा जगत भाषा बाटे ओकरा के हिंदुस्तानी भी कहल जाला।

मानक हिंदी, हिंदी के अइसन रूप हवे जेह में संस्कृत के परभाव ज्यादा बा आ जवन तकनीकी शब्दावली, सरकारी कामकाज आ साहित्य के भाषा बाटे। ई भारत के राजभाषा (राष्ट्रभाषा नाहीं) भी हवे हालाँकि बहुत जगह सरकारी कामकाज अंगरेजी में भी होला। मानक हिंदी के अलावा हिंदी बोली सभ के समूह बा जिनहन में से कई गो वास्तव में अलग भाषा हईं लेकिन आम शब्दावली में इनहन के हिंदी के बोली या हिंदी भाषा सब के अंतर्गत रखल जाला। हिंदी पर क्षेत्रीय भाषा के परभाव से लहजा इत्यादि में अंतर के कारण बिहारी हिंदी या भोजपुरी-हिंदी इत्यादि के अनौपचारिक वर्गीकरण भी मिले ला।

हिंदी भाषा के देवनागरी लिपि मे लिखल जाला, हालाँकि अंगरेजी के बढ़त परभाव के कारण कुछ लोग एकरा के रोमन लिपि में भी लिखे ला, खासतौर पर इंटरनेट आ चैटिंग इत्यादि में। हिंदी आ इंग्लिश के मिला-जुला रूप के हिंग्लिश के नाँव भी दिहल गइल बा।

भारत में 258 मिलियन लोग पहिली भाषा के रूप में आ 120 मिलियन लोग दूसरी भाषा के रूप में हिंदी बोले वाला बतावल जाला। 2001 में भारत के जनगणना के आँकड़ा अनुसार भारत में कुल 42 करोड़ से ढेर लोग के मातृभाषा हिंदी हवे (हालाँकि एह आंकड़ा में भोजपुरी नियर भाषा बोले वाला लोग सब के भी सामिल कइल गइल बा) आ एकरे बाद लगभग 12 करोड़ लोग के दूसरी भाषा हवे।हिंदी के साहित्य में आमतौर पर मध्य क्षेत्र के बोली सब में भइल 11वीं सदी के आसपास तक ले के रचना सभ से ले के आधुनिक काल तक के हिंदी में भइल रचना सभ के गिनल जाला।

दुसरी भाषा में

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