ज्ञानकोश

ज्ञानकोश भा एन्साइक्लोपीडिया संदर्भ देवे/खोजे में इस्तमाल होखे वाला रचना हवे जेह में तथ्यात्मक जानकारी के एकट्ठा क के लेख के रूप में प्रस्तुत कइल गइल होला। ई दुनिया के हर तरह के ज्ञान से संबंधित बिसय सभ पर भी हो सके ला आ कौनों खास अध्ययन बिसय के ऊपर भी, जइसे भूगोल के ज्ञानकोश में खाली भूगोल से संबंधित बिसय पर तथ्यात्मक लेख मौजूद होखीहें। ई किताब भा कई खंड में किताबन के संकलन के रूप में हो सके ला - जइसे ब्रिटैनिका एन्साइक्लोपीडिया के छपल संस्करण, सीडी में आवे वाला हो सकेला - जइसे एन्कार्टा, या फिर इंटरनेट आधारित ऑनलाइन संस्करण हो सकेला - जइसे कि विकिपीडिया

संछेप में, ज्ञानकोश मानवीय ज्ञान से सगरी शाखा पर या कौनों एक ठो शाखा से जानकारी के सारगर्भित संकलन से बनल एक ठो संदर्भ रचना होला।[1] आमतौर पर एह में लेख (या एंट्री) सभ अच्छर क्रम से सजावल गइल होलें।[2]

हर टॉपिक डिक्शनरी के परिभाषा से पर्याप्त बड़ होला, काहें कि डिक्शनरी (शब्दकोश) में शब्दन के भाषाई अरथ आ इस्तमाल समझावल गइल होला, जबकि ज्ञानकोश के एंट्री तथ्यात्मक जानकारी देवे खातिर होला।[3][4][5][6]

Brockhaus Lexikon
एगो एन्साइक्लोपीडिया के लाइब्रेरी में सजल खंड सभ।

इहो देखल जाय

संदर्भ

  1. "Encyclopedia". ओरिजनल से अगस्त 3, 2007 के पुरालेखित. Glossary of Library Terms. Riverside City College, Digital Library/Learning Resource Center. Retrieved on: November 17, 2007.
  2. Hartmann, R. R. K.; James, Gregory; James, Gregory (1998). Dictionary of Lexicography. Routledge. प. 48. ISBN 0-415-14143-5. पहुँचतिथी जुलाई 27, 2010.
  3. Béjoint, Henri (2000). Modern Lexicography, pp. 30–31. Oxford University Press. ISBN 0-19-829951-6
  4. "Encyclopaedia". Encyclopædia Britannica. पहुँचतिथी जुलाई 27, 2010. An English lexicographer, H.W. Fowler, wrote in the preface to the first edition (1911) of The Concise Oxford Dictionary of Current English language that a dictionary is concerned with the uses of words and phrases and with giving information about the things for which they stand only so far as current use of the words depends upon knowledge of those things. The emphasis in an encyclopedia is much more on the nature of the things for which the words and phrases stand.
  5. Hartmann, R. R. K.; Gregory, James (1998). Dictionary of Lexicography. Routledge. प. 49. ISBN 0-415-14143-5. पहुँचतिथी जुलाई 27, 2010. In contrast with linguistic information, encyclopedia material is more concerned with the description of objective realities than the words or phrases that refer to them. In practice, however, there is no hard and fast boundary between factual and lexical knowledge.
  6. Cowie, Anthony Paul (2009). The Oxford History of English Lexicography, Volume I. Oxford University Press. प. 22. ISBN 0-415-14143-5. पहुँचतिथी अगस्त 17, 2010. An 'encyclopedia' (encyclopaedia) usually gives more information than a dictionary; it explains not only the words but also the things and concepts referred to by the words.
आयरिश भाषा

आयरिश भाषा (अंगरेजी: Irish language) या गैलिक भाषा भा आयरिश गैलिक भाषा, मूल रूप से आयरलैंड में जनमल भाषा बाटे। ई इंडो-यूरोपियन परिवार के भाषा हवे जे आयरलैंड में आ आयरिश लोग द्वारा अन्य जगह पर बोलल जाले।

इंटरनेट

इंटरनेट (अंगरेजी:Internet) आपस में जुड़ल कंप्यूटर नेटवर्क सभ के बैस्विक सिस्टम हवे जे इंटरनेट प्रोटोकाल सूट (टीसीपी/आइपी) के इस्तमाल से दुनिया भर के कंप्यूटर डिवाइस सभ के आपस में जोड़े ला। ई एक तरह से नेटवर्क सभ के नेटवर्क हवे जेह में लोकल से ले के बैस्विक बिस्तार क्षेत्र वाला प्राइवेट, पब्लिक, एकेडेमिक, ब्या सायिक आ सरकारी नेटवर्क सभ आपस में इलेक्ट्रानिक, वायरलेस आ ऑप्टिकल टेक्नालॉजी के माध्यम से जुड़ल बाड़ें। इंटरनेट पर बिबिध प्रकार के जानकारी संसाधन मौजूद बाड़ें आ बिबिध तरह के सेवा सभ उपलब्ध करावल जालीं जिनहन में वल्ड वाइड वेब के आपस-में-जुड़ल हाइपरटेक्स्ट डाकुमेंट आ एप्लीकेशन, ई-मेल, टेलीफोनी, आ फाइल शेयर करे नियर चीज प्रमुख बाड़ी स।

एन्साइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका

एन्साइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका (Encyclopædia Britannica; मने कि:ब्रिटेन के ज्ञानकोश) अंगरेजी भाषा में एगो ज्ञानकोश हवे। अंगरेजी भाषा के ज्ञानकोश सभ में ई सभसे पुरान ज्ञानकोश हऽ जे अभिन ले प्रकाशन में बा। एकर पहिला संस्करण 1768 से 1771 के बीचा में तीन खंड में छपल आ कागज पर छपे वाला एकर अंतिम संस्करण, 15वाँ संस्करण रहल जे 32 खंड में साल 2010 में छपल आ एह में 32 हजार छऽ सौ चालिस पन्ना रहलें। एकरे बाद से ई डिजिटल आ ऑनलाइन प्रकाशन में बा।

जयप्रकाश नारायण

खाली जे.पी. शब्द सुनते ही दिल आ दिमाग पर एगो अलगे महान व्यक्तित्व आ असाधारण पुरूष के छवि चमके लागेला। आँख अदृश्यता के लांघ के, साक्षात दर्शन करावेला ओह लाल के जवना लाल के जनम देहलस बलिया के माटी ओह माटी, ओह गाँव के नत्‌मस्तक प्रणाम।

जी हाँ हम बात करतानी जयप्रकाश नारायण के जे जयप्रकाश नारायण से कम आ जे.पी. के नाम से ज्यादा विख्यात रहले। उनका सेवा भावना, त्याग आ तपस्या से प्रभावित होके लोग उनका के लोकनायक भी कहत रहे। लोकनायक के मतलब होला, जन-जन के नेता। उ सचमुच के जनता के नायक रहले। उनका जनता के पूर्ण विश्वास आ भरपुर प्रेम हासिल रहे।

लोकनायक जयप्रकाश नारायण के जनम 1 अक्टूबर 1902 के बलिया जिला के सिताबदियारा गाँव में भइल रहे। उनका के छव साल के उमर में गाँव के प्राथमिक स्कूल में पढ़े खातिर भेजल गईल। जयप्रकाश नारायण स्वभाविक तेज तरार आ बुद्धिमान रहले। नवे साल के उमर में उ सातवाँ कलास में पहुँच गईले आ सन्‌ 1919 में हायर सेकेंडर इम्तिहान प्रथम श्रेणी से उतीर्ण कइले।

19 साल के उमर तक पहुँचते-पहुँचते उनका पर तत्कालीन राष्ट्रीय आन्दोलन के प्रभाव पड़े लागल आ राष्ट्रीयता के संगे-संगे उ समाजवादी विचार-धारा के सम्पर्क में अईले आ जल्दिये भारतीय समाजवादी आन्दोलन के प्रमुख नेता लोग में उनकर गिनती होखे लागल। गांधीजी के आह्‌वान पर जे.पी. अध्ययन छोड़ के राष्ट्रीय आन्दोलन में सक्रीय भाग लिहलें , लेकिन जल्दिये इनका विदेश में शिक्षा प्राप्त करे के धुन सवार हो गईल आ अमेरिका में उच्च शिक्षा खातिर चल गईले।

इनकर बियाह 18 साल के उमर में प्रसिद्ध समाज-सेवी श्री ब्रजकिशोर प्रसाद के बेटी सुश्री प्रभावती जी से भइल। प्रभावती जी उनका जीवन के ही ना बल्की उनका समाजिक गतिविधि के भी एगो अंग बन गईली।

देश-सेवा खातिर कौ-कौ बार उनका जेल-यातना भी भोगे के परल। जे.पी. गांधी जी के विचार से बहुत प्रभावित रहलें आ जीवनभर सत्ता से दूर रहके उनका आदर्श पर चलते गइलें। नेहरू जी उनका के बहुत मानत रहलें। उ जयप्रकाश जी के अपना मंत्रिमण्डल में शामिल होखे खातिर नेवता देले रहले। लेकिन सत्ता के राजनीति में रूचि ना होखे के कारण ओकरा के उ ठुकरा दिहले।

बाद में उनका सर्वोदय विचारधारा से संबंध हो गईल। भूदान आन्दोलन में उनकर सक्रिय सहयोग महत्वपूर्ण रहे। सन्‌ 1975 में उ देश के नवयुवकन के नेतृत्व एक बार फेर से सम्हरलें।

5 जून 1975 ई में दिल्ली के विशाल रामलीला मैदान में उ समग्र क्रान्ति के घोषणा कइलें आ ओही रात आपात स्थिति लगाके जयप्रकाश जी के गिरफ्तार कर लेहल गईल।

जेल में ही जयप्रकाश जी के गुर्दा खराब हो गईल। उनका के दिल्ली के आर्युविज्ञान संस्थान में, फेर बाद में बम्बई के जसलोक अस्पताल में भरती कइल गईल।

डाक्टर लोग के सूझ-बूझ आ मेहनत से उनका प्राण के रक्षा कइल गईल, लेकिन तब से निरन्तर जे.पी. जी रोगशय्या पर पड़ल रहस। आखीर ई स्वतंत्रता सेनानी, विचारक, चिंतक आ क्रांतिकारी व्यक्तित्व 9 अक्टूबर 1979 के चिरनिद्रा में सुत गइलें।

बिहारी भाषा

बिहारी भाषा भारतीय राज्य बिहार आ एकरे आसपास के राज्यन में आ सटल नेपाल में बोलल जाए वाली पुरबी इंडिक भाषावन सभ के समूह हऽ। एह भाषा सभ में भोजपुरी, मगही, मैथिली आ अंगिका मुख्य भाषा बाड़ी स। प्रमुख रूप से भारत के ई भाषा सभ के बोले वालन के संख्या नेपालो में 21% से भी ढेर बा।

हालाँकि, एह भाषा सभ के बोले वालन के संख्या बहुते ढेर बा, तबो प मैथिली के अलावा भारत में इनहन के संबैधानिक रुप से भाषा के दर्जा नइखे आ इनहन के हिंदी के बोली के रूप में मानल जाला। मैथिली के 2003 में संविधान के 92वें संशोधन में संबैधानिक दर्जा मिलल। अहिजा तक कि बिहारे में, पढ़ाई-लिखाई आ कार्यालयी क्षेत्र में हिंदी भाषा इस्तमाल होखे ला। इ भाषावन के 1961 में कानूनी रुप से हिंदी के ब्यापक छत्रछाया में बोली मान लिहल गइल। इ तरिक से राज्य आ राष्ट्रिय राजनीति अइसन भाषावन के लोप होवे के अवस्था बना रहल बा लोग।नालंदा खुला विश्वविद्यालय बिहारी भाषावन (मगही, भोजपुरी, मैथिली) में कई तरह के कोर्स उपलब्ध करवले बा। आजादी के बाद हिंदी भाषा के बिहार के एकमात्र अधिकारिक भाषा के तौर पर बिहार अधिकारिक भाषा एक्ट, 1950 में जगह दिहल गइल। 1981 में हिंदी एकमात्र अधिकारिक भाषा के दर्जा से हट गइल आ एकरे साथे-साथ उर्दू के दूसर अधिकारिक भाषा के दर्जा दिहल गइल। हिंदी आ उर्दू के एह लड़ाई में बहुत अधिक संख्या में बोले जाये वाल भाषावन मगही, भोजपुरी आ मैथिली के अनदेखा कर दिहल गइल।

भारत के जंगली जीव

भारतीय जंगली जीव में कई सारा जीव जंतु आ पौधा आवेलें जेवन भारत के इलाका में रहे लें। आम जानवर जइसे की गाय भइस बकरी इत्यादि की अलावा भारत में पशु-पक्षी के बहुत सारा प्राजाति पावल जालिन।

भोजपुरी विकिपीडिया

भोजपुरी विकिपीडिया विकिपीडिया के भोजपुरी भाषा में बनल संस्करण हवे। 01 जनवरी 2017 तक भोजपुरी विकिपीडिया में कुल 8,492 लेख रहलें।

भोजपुरी संस्कृति

भोजपुरी संस्कृति के ही भोजपुरिया संस्कृति भी कहल जाला| भोजपुरी के अन्य भाषा से संबंध के बारे में कहल जाला -

मैथिल के बहिन लागे अवधी के भाई |

अंगरेजी के बाप लगे संस्कृत के माई||

प्रकृति के जन्मल बेटी पिए गंगा के पानी |

सहज सुशील बिनम्र दुअर्थी एह भाषा के पहिचानि||

भोजपुरी संस्कृति के इतिहास

भोजपुरी संस्कृति के इतिहास अशोक महान से भी पुरान ह अशोक महान के पूरा नाम देवानांप्रिय अशोक मौर्य रहे उनकर राजकाल ईसापूर्व 273 से 232 तक रहे प्राचीन भारत में मौर्य राजवंश के चक्रवर्ती राजा रहले उनका समय में मौर्य राज्य उत्तर में हिन्दुकुश के श्रेणि से ले के दक्षिण में गोदावरी नदी के दक्षिण आ मैसूर पूर्व में बंगाल से पश्चिम में अफ़गानिस्तान तक पहुँच गईल रहे । एह समय के उ बहुत प्रतापी राजा रहन। बिहार के प्राचीन नाम ’विहार’ रहे , जिसका मतलब मठ होला । यी भारत के पूर्वी भाग में स्थित बा क्षेत्रफल के हिसाब से बिहार भारत का बारहवां सबसे बड़ा और आबादी के मान से तीसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य ह। बंगाल के क्षेत्र में पहुंचने से पहले गंगा नदी एहि राज्य से बहेली जेकरा कारन यी राज्य वनस्पति आ जीव-जन्तु से समृद्ध बा। बिहार के वन क्षेत्र भी विशाल बा जवन कि 6,764 वर्ग किमी के बा यी राज्य भाषाई तौर पर प्रभावकारी बा एहिजा कई भाषा बाडिस जवना में भोजपुरी प्रधान भाषा मानल जाला, बिहार की राजधानी पटना ह, जेकर नाम पहले पाटलीपुत्र रहे । भारत के कुछ महान राजा जैसे समुद्रगुप्त, चन्द्रगुप्त मौर्य, विेक्रमादित्य और अशोक के शासन में बिहार शक्ति, संस्कृति और शिक्षा क केन्द्र बन गईल रहे यह समय दुगो महान शिक्षा केन्द्र रहन , विक्रमशिला और नालंदा विश्वविद्यालय। बिहार में आज भी 3,500 साल पुरान इतिहास के गवाही देत कई प्राचीन स्मारक मौजूद बाड़िस

अन्य संस्कृति से भिन्नता

भोजपुरी संस्कृति के अन्य संस्कृति से भिन्न पवित्र आ मानवता के नजदीक होखे के कुछ प्राकृतिक अउर दैविक कारन भी बा संस्कृत भाषा के एक रचना जवना के उत्तरी संस्करण में सिंहासनद्वात्रिंशति तथा "विक्रमचरित के नाम से दक्षिणी संस्करण में उपलब्ध बा एकर संस्कर्ता एक मुनि जी रहन जिनकर नाम क्षेभेन्द्र रहे बंगाल में वररुचि जी के द्वारा प्रस्तुत संस्करण भी एहि के समरुप मानल जाला एकर दक्षिणी रुप ज्यादा लोकप्रिय भइल लोक भाषा में एकर अनुवाद होते रहे अउर पौराणिक कथा नियन भारतीय समाज में मौखिक परम्परा के रुप में रच-बस गइलस यी कथा के रचना "वेतालपञ्चविंशति" या "बेताल पच्चीसी" के बाद भइल लेकिन निश्चित रुप से रचनाकाल के बारे में कुछ नईखे कहल जा सकत। एतना लगभग तय बा कि एकर रचना धारा के राजा भोज के समय में ना भइल होई काहेकि प्रत्येक कथा में राजा भोज के उल्लेख मिलेला यह से एकर रचना काल 11वीं शताब्दी के बाद भइल होई । एकरा के द्वात्रींशत्पुत्तलिका के नाम से भी जानल जाला ।

लोक कथा

एह कथा के भूमिका में भी कथा बा जवन राजा भोज की कथा कहेलिस 32 कथा 32 पुतलि के मुह से कहल बा जवन एक सिंहासन में लागल बाडीस। यी सिंहासन राजा भोज के विचित्र परिस्थिति में मिलल। एक दिन राजा भोज के मालूम भइल कि एक साधारण चरवाहा अपना न्यायप्रियता खाती मसहूर बा , जबकि उ बिल्कुल अनपढ़ बा तथा पुश्तैनी रुप से उनके राज्य के कुम्हार के गायी, भैंस बकरि चरावेला । जब राजा भोज तहक़ीक़ात करवले त पता चला कि उ चरवाहा सब फैसला एगो छोट पहाड़ पर चढ़ के करेला राजा भोज के जिज्ञासा बढ़ गईल तब उ भेष बदल के वोह चरवाहा के पास गईले ओकरा के कठिन समस्या के समाधान करत देख राजा दंग रह गईले वो चरवाहा के नाम चन्द्रभान रहे। राजा के पुछला पर चन्द्रभान एक दिब्य शक्ति के बारे में राजा के बतवलस की उ शक्ति एहि टीला पर हमरा आवेली आ हमरा के उचित न्याय करे में मदत करेली। जब राजा वोह जगह के खोदवावले तब उनका एक सिंघासन मिलल। राजा पंडित लोग के बोला के सिंघासन पर बैठे के मुहूर्त निकलवले आ जब मुहूर्त के दिन सिंघासन पर बैठे चलले तब सिंघासन में लागल सोना के बत्तीस पुतरी ठठा के हंस देली स। जब राजा पुतरी से हँसे के कारन पुछले तब पुतरी कहे लगलि स ये राजन यी सिंघासन त राजा बिक्रमादित्य के ह एकरा प तू तबे बईठीह जब तू राजा बिक्रमादित्य नियन होइह तब राजा पुछले की राजा बिक्रमादित्य में का खासियत रहे एह सवाल के जबाब में बिक्रमादित्य के बत्तीस गो पुतली 32 गो काथा सुनवलिस एहि 32 कथा के आधार पर राजा भोज के एगो सभ्य संस्कृति के ज्ञान भइल जेकरा के उ भोजपुरी संस्कृति के नाम से परम प्रतापी राजा बिकमादित्य के दिब्य अंश के रूप में लोक कल्याण खाती छोड़ गईल बाड़े राजा बिक्रमादित्य के समय से ही काल गड़ना चलल जेकरा के विक्रम सम्बत कहल जाला हिन्दू आर्य के संस्कृति भी ईहे ह जवन आज भी भोजपुरी संस्कृति के नाम से जानल जाले

मैथिली

मैथिली उत्तरी बिहार आ नेपालके तराई प्रदेश मे बोलल जाए वाली एगो भाषा बा। आजुकाल्ह मैथिली भाषा देवनागरी में लिखल जात बा, बाकी पहिले ई तिरहुता लिपि में लिखल जाव।

विद्यापति

विद्यापति (1352–1448), चाहे बिद्यापति, एगो भारतीय कवी रहलें जे मैथिली, अवहट्ट आ संस्कृत में आपन रचना कइलें, प्रमुख रूप से इनके मैथिली के रचना खाती जानल-मानल जाला आ मैथिली भाषा के आदि कवी आ "मैथिल कोकिल" के उपाधी दिहल जाला। कबिता के अलावा संस्कृत में गद्य लेखन के काम भी कइलेन। भक्ति आ शृंगार इनके रचना सभ के मुख्य बिसय रहल आ कबिता के रूप गीत आ पद रहल। शिव-पारबती आ राधा-कृष्ण दुनों इनके भक्ति वाली रचना के बिसय बनल लोग।

इनके साहित्यिक परभाव बाद के हिंदुस्तानी भाषा, मैथिली भाषा आ बंगाली भाषा के साहित्य पर सीधा-सीधा, आ अप्रत्यक्ष रूप से नेपाली, ओडिया आ असमिया भाषा के साहित्य पर पड़ल। विद्यापति के समय अइसन रहे जेह समय साहित्य आ संपर्क के भाषा अवहट्ट रहल आ वर्तमान मैथिली, बंगाली इत्यादि देसी भाषा सभ के बिकास सुरू भइल रहल, एही से इनके रचना सभ के परभाव, जे देसी बोली के साहित्य के भाषा बना के रचल गइली सऽ, एह सगरी पूरबी भाषा सभ पर परल। एही कारन बिद्यापति के भारतीय साहित्य में लगभग उहे दर्जा दिहल जाला जे इटली में दांते के भा इंग्लैंड में चॉसर के दिहल जाला।इनके मैथिलि रचना सभ प आधारित बिदापती नाच बाद के समय में बिहार-नेपाल के मिथिला क्षेत्र के खास बिधा के रूप में अस्थापित भइल। विद्यापति के मैथिली गीत सभ आज भी लोकगीत के रूप में सुनल-गावल जालें आ इनके रचना साहित्य में उच्च-कक्षा सभ में पढ़ावल जालीं।

सबसे ऊँच परबतन के लिस्ट

कम से कम 109 गो चोटी अइसन बाड़ी जिनके ऊँचाई समुंद्र तल से 7,200 मीटर (23,622 फीट) से ढेर बाटे। इन्हन में से सभ चोटी दक्खिनी आ मध्य एशिया में मौजूद बाड़ी। इन्हना में खाली उनहन के बीछल गइल बा जिनहना के उप-चोटी न मान के अलगा से परबत चोटी के दर्जा दिहल जाला।

दुसरी भाषा में

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